सऊदी अरब पर बड़ा हमला, मस्जिद पर मिसाइल गिरने से दो घायल और पाइपलाइन बंद.

Nura Basta13 September 20262 min read175 viewsSaudi
सऊदी अरब पर बड़ा हमला, मस्जिद पर मिसाइल गिरने से दो घायल और पाइपलाइन बंद.

खाड़ी देशों में सुरक्षा की स्थिति एक बार फिर से बेहद गंभीर हो गई है क्योंकि 13 सितंबर 2026 को यमन की ओर से आए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जजान इलाके में एक मस्जिद पर मिसाइल दागी। इस खतरनाक हमले में दो लोग घायल हुए और मस्जिद के साथ-साथ कई इमारतों और गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है। सऊदी सिविल डिफेंस ने इस कायराना हरकत को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है, जिससे आम जनता में भी काफी डर का माहौल बन गया है।

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमला

एक तरफ जहां मिसाइल ने मस्जिद को निशाना बनाया, वहीं दूसरी तरफ इराक के मयसान प्रांत से दागे गए ड्रोन ने सऊदी अरब की जरूरी East-West crude pipeline को ठप कर दिया। रियाद और मदीना के पास बने पंपिंग स्टेशनों पर ड्रोन गिरने से कई लोग जख्मी हुए, जिसके बाद सुरक्षा के तौर पर इस पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने के कारण यह पाइपलाइन दुनिया भर में तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए मुख्य विकल्प थी, लेकिन अब इसके बंद होने से ग्लोबल मार्केट में चिंता बढ़ गई है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है तनाव की स्थिति

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इराकी सरकार ने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं और एक स्थानीय कमांडर को बर्खास्त कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि अभी तक किसी भी समूह ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पिछले छह महीनों से पूरा खाड़ी क्षेत्र होर्मुज में ईरानी नौसेना की सख्ती और लाल सागर में हूती हमलों के दबाव से जूझ रहा है। ओमान में सोमवार को ईरान और खाड़ी देशों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होनी तय है, लेकिन बहरीन ने साफ कर दिया है कि जब तक दोनों देशों के बीच पुराने कूटनीतिक रिश्ते बहाल नहीं होते, तब तक वह इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगा।

प्रवासियों और भारतीय कामगारों पर असर

खाड़ी के इन हालात का असर वहां रहने वाले लाखों प्रवासियों और खासकर भारत से गए कामगारों पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब, यूएई, ओमान और कतर जैसे देशों में रहने वाले भारतीय नागरिक सुरक्षा के इन नए खतरों को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। हालांकि यूएई, कतर, ओमान, सऊदी अरब और बहरीन की सरकारें मिलकर इन मिसाइल और ड्रोन खतरों के बीच स्थिति को संभालने की पूरी कोशिश कर रही हैं और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, ताकि आम जनता और कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Share:

Comments

Leave a comment