यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा कब्जा, मोखा पोर्ट सीज होने से दुनिया भर के कारोबार पर मंडराया बड़ा खतरा.

यमन के पश्चिमी तट पर हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और संघर्ष चार साल के सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 10 सितंबर 2026 को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद हूती लड़ाके दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के बेहद करीब पहुंच गए हैं। यह जलमार्ग यूरोप और एशिया के बीच होने वाले व्यापार के लिए एक मुख्य रास्ता है, जिस पर अब सीधा खतरा मंडराने लगा है।
रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह इलाका
रक्षा विश्लेषक वोल्फगंग पुस्ज़ताई के अनुसार, मोखा पर नियंत्रण हासिल करने के बाद हूती विद्रोही इस करीब 20 किलोमीटर चौड़े जलमार्ग को आसानी से निशाना बना सकते हैं। यहां तक कि वे अपनी तोपों का इस्तेमाल करके भी इस रास्ते पर दबाव बना सकते हैं। इस अचानक हुए हमले और बढ़ते तनाव के बाद यमन की सरकारी सेना को पीछे हटना पड़ा है। सेना के जवानों को भारी नुकसान हुआ है और कई सैनिकों की जान जाने की खबर है। इसके बाद सरकारी ताकतें पीछे हटते हुए धुबाब नाम के तटीय शहर की तरफ बढ़ रही हैं, जो पेरिम द्वीप के ठीक सामने स्थित है.
सऊदी अरब और खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता
इस बीच संघर्ष सिर्फ यमन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के सीमावर्ती प्रांतों पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों में कई लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। कतर में यमन के राजदूत राजेह हुसैन फरहान बदी ने 9 सितंबर को बयान दिया था कि यह सब सऊदी अरब को सीधे युद्ध में घसीटने की एक सोची-समझी साजिश है। हालांकि पाकिस्तान ने हाल ही में तेहरान को सऊदी चेतावनी पहुंचाई थी, लेकिन एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने हूती आंदोलन पर किसी भी तरह के सीधे नियंत्रण से इनकार किया है।
वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर
यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-इर्यानी ने पहले ही 19 अगस्त को आगाह किया था कि विद्रोही इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट के आसपास की जमीन पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं ताकि वैश्विक सप्लाई चेन को डराया जा सके। इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी आप ReliefWeb Report पर जाकर पढ़ सकते हैं। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट ने भी चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संकट अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है.