IAEA चीफ का बड़ा बयान, ईरान द्वारा परमाणु फैसिलिटी फिर से बनाने का कोई ठोस सबूत नहीं

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के महानिदेशक Rafael Grossi ने 27 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि इस समय ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि ईरान अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों के बाद अपने परमाणु संयंत्रों को फिर से बना रहा है। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही चर्चाओं को एक नया मोड़ मिला है।
परमाणु संयंत्रों को हुआ था नुकसान
Rafael Grossi ने अर्जेंटीना के अखबार Clarin को दिए इंटरव्यू और वॉशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले साल हुए 'Twelve-Day War' यानी बारह दिवसीय युद्ध के दौरान इन परमाणु सुविधाओं को काफी नुकसान पहुंचा था। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हो सकता है ईरान वहां कुछ बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण शुरू कर रहा हो, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई पक्का और ठोस प्रमाण उनके पास मौजूद नहीं है।
यूरेनियम का स्टॉक सुरक्षित
एजेंसी प्रमुख ने आगे बताया कि ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम का जो भंडार है, वह संघर्ष के समय से ही अपनी तय जगहों पर सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने यह भी माना कि ईरान के साथ परमाणु वार्ता फिलहाल एक गतिरोध और ठप पड़ी स्थिति में पहुंच गई है। यह पूरा मामला हॉर्मूज जलडमरूमध्य की स्थिति सहित व्यापक भू-राजनीतिक तनावों से भी जुड़ा हुआ है। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद, IAEA ने यह स्पष्ट किया है कि एजेंसी ईरान में अपना काम फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान का कड़ा रुख
दूसरी तरफ, परमाणु ऊर्जा संगठन ईरान यानी AEOI के प्रमुख Mohammad Eslami ने 26 अगस्त 2026 को यह बयान दिया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाई के बावजूद उनके देश का परमाणु उद्योग दुनिया की बड़ी ताकतों के मुकाबले में बना हुआ है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हालिया हमलों में क्षतिग्रस्त हुए परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण करने के लिए IAEA के निरीक्षकों को तब तक अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक नए निरीक्षण नियम और खास प्रोटोकॉल तय नहीं हो जाते।
ईरान के एक संसदीय कानून का हवाला देते हुए Mohammad Eslami ने आरोप लगाया कि IAEA ने सैन्य हमलों की निंदा करने में असफलता दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल इन साइटों तक पहुंच हासिल करने के लिए एजेंसी पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने अंत में यह भी जोड़ा कि ईरान अभी भी युद्ध जैसी स्थिति में है, इसलिए प्रभावित जगहों को बाहरी निरीक्षण के लिए अभी सुरक्षित या तैयार नहीं किया गया है।