अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने सीरिया पर 15 साल पुराना मामला किया बंद, कतर और खाड़ी देशों ने किया स्वागत

Praggya Singh sabal10 September 20262 min read42 viewsWorld
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने सीरिया पर 15 साल पुराना मामला किया बंद, कतर और खाड़ी देशों ने किया स्वागत

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने बुधवार, 9 सितंबर 2026 को सीरिया के खिलाफ चल रहे परमाणु गैर-अनुपालन के मामले को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है। इस फैसले के साथ ही डेर अल-ज़ौर में एक संदिग्ध अघोषित परमाणु रिएक्टर को लेकर चली आ रही 15 साल पुरानी जांच समाप्त हो गई है। बोर्ड के 35 सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को अपनाया, जिससे साल 2011 के उस फैसले का असर खत्म हो गया जिसमें सीरिया को उसके सुरक्षा उपायों के तहत दोषी माना गया था।

ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता और सीरियाई प्रशासन का सहयोग

यह बड़ा फैसला IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी द्वारा सोमवार, 7 सितंबर 2026 को घोषित किए गए एक ऐतिहासिक बदलाव के बाद आया है। सीरिया के नए प्रशासन ने एजेंसी को जरूरी जानकारी दी और डेर अल-ज़ौर सुविधा केंद्र तथा अन्य प्रतिबंधित जगहों तक जाने की पूरी अनुमति दी। महानिदेशक ग्रोसी ने बताया कि बशर अल-असद के शासनकाल में यह सीक्रेट रिएक्टर बनाया गया था जिसे साल 2007 में नष्ट कर दिया गया था और इसमें परमाणु हथियार बनाने की सामग्री पैदा करने की क्षमता थी। हालांकि, नए प्रस्ताव में सीरिया को लगातार सहयोग जारी रखने के लिए कहा गया है जिसमें उस जगह पर चल रही खुदाई का काम भी शामिल है। सीरिया अभी भी परमाणु अप्रसार संधि के नियमों के दायरे में आता है।

खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय समर्थन

कतर के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कदम का स्वागत किया और भरोसा जताया कि इस मामले के बंद होने से सीरिया देश के पुनर्निर्माण के लिए शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल का पूरा फायदा उठा सकेगा। इस प्रस्ताव को मिस्र, जॉर्डन, मोरक्को और सऊदी अरब जैसे देशों के समर्थन से लाया गया था। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने भी इस फैसले का स्वागत किया है जिससे यह साफ होता है कि सीरिया के परमाणु मामलों को सामान्य बनाने के लिए पूरा क्षेत्र एक साथ खड़ा है। इस बारे में अधिक जानकारी आप QNA की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। सीरियाई अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा आयोग के जरिए इस फैसले को एक बड़ी रणनीतिक सफलता बताया है जिससे देश को शांतिपूर्ण कामों के लिए परमाणु विज्ञान अपनाने का हक वापस मिल गया है और इससे जुड़े प्रतिबंध भी खत्म हो गए हैं।

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