IAEA के प्रस्ताव से दुनिया में बढ़ सकता है तनाव, ईरान ने दी चेतावनी कि खत्म हो जाएगी परमाणु व्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के संचालक मंडल ने एक नया प्रस्ताव पास किया है, जिसके बाद से दुनिया भर में कूटनीतिक हलचल काफी ज्यादा तेज हो गई है। इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु मामले को सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC के पास भेजने की बात कही गई है। ईरान ने इस पूरे कदम को एक राजनीतिक साजिश करार दिया है और साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था बेहद कमजोर हो जाएगी और एक दिन पूरी तरह से खत्म होने का बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। यह पूरा मामला ऐसे वक्त पर सामने आया है जब मध्य पूर्व और दुनिया के कई देशों के बीच आपसी रिश्ते काफी नाजुक दौर से गुजर रहे हैं और लगातार सैन्य तनाव बना हुआ है।
किन देशों ने किया समर्थन और किसने किया विरोध
वियना में हुई इस बैठक के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने मिलकर इस प्रस्ताव को तैयार किया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 23 देशों ने अपना समर्थन दिया, जबकि रूस, चीन और नाइजर ने इसके खिलाफ में मतदान किया। इसके अलावा करीब 8 देशों ने इस पूरी वोटिंग प्रक्रिया से खुद को पूरी तरह से दूर रखा और मतदान में हिस्सा नहीं लिया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव में एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से यह कहा गया है कि वह ईरान के इस संवेदनशील मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा के सामने रखें। पिछले करीब 20 सालों में यह पहला ऐसा मौका है जब ईरान की परमाणु प्रतिबद्धताओं से जुड़े किसी मामले को इस तरह से सीधे सुरक्षा परिषद को भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
ईरान का कड़ा रुख और पश्चिमी देशों पर आरोप
ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना स्थित ईरानी मिशन ने इस प्रस्ताव को बिना किसी व्यापक सहमति के जल्दबाजी में पारित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। ईरान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई से परमाणु अप्रसार व्यवस्था के और ज्यादा कमजोर होने का रास्ता साफ होता है। ईरानी अधिकारियों का यह कहना है कि मौजूदा परमाणु गतिरोध के लिए मुख्य रूप से अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि इन देशों ने उनके शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। ईरान ने अमेरिका के उस कथित प्रयास को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें तेहरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने और उसकी तेल संपदा पर अपना नियंत्रण हासिल करने की बात कही जा रही थी।
सैन्य हमलों को लेकर उठे सवाल
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने भी आईएईए और पश्चिमी देशों के तर्कों पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिन परमाणु स्थलों तक पहुंच नहीं होने की शिकायत बार-बार की जा रही है, उस स्थिति के लिए असल में विदेशी सैन्य हमले पूरी तरह जिम्मेदार हैं। ईरानी पक्ष का आरोप है कि पहले उनकी परमाणु सुविधाओं पर सुनियोजित तरीके से हमले किए गए, जिससे सामान्य निरीक्षण प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई और अब उसी बिगड़ी हुई स्थिति को ईरान के खिलाफ प्रस्ताव लाने का मुख्य आधार बनाया जा रहा है। वियना स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में ईरानी राजदूत रज़ा नजाफी ने मतदान के तुरंत बाद पत्रकारों से बातचीत में इस प्रस्ताव को एक राजनीतिक हथियार बताया। भविष्य में आईएईए के निरीक्षण और सहयोग को लेकर उन्होंने साफ किया कि ईरान अपनी परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था को अच्छी तरह परखने के बाद ही जरूरी सहयोग तय करेगा।