IEA का बड़ा ऐलान, 2026 और 2027 के लिए तेल की मांग में भारी कटौती, गल्फ संकट का असर.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी International Energy Agency (IEA) ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को अपनी एक नई तेल बाजार रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में साल 2026 और 2027 के लिए वैश्विक तेल की मांग के अनुमानों को काफी कम कर दिया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव और गल्फ देशों तथा باب el-Mandeb जलडमरूमध्य में लगातार हो रहे हमलों के कारण यह कदम उठाया गया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले दो साल तेल की मांग में बढ़ोतरी के लिहाज से एक खराब दौर साबित होने वाले हैं। आम आदमी की भाषा में समझें तो दुनिया भर में तेल की खपत और आपूर्ति दोनों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ने वाला है.
तेल की मांग में भारी गिरावट
साल 2026 के लिए IEA का नया अनुमान है कि वैश्विक तेल की मांग में प्रतिदिन 2.5 मिलियन बैरल (mb/d) की गिरावट आएगी। अगस्त महीने में जो अनुमान जताया गया था, उसके मुकाबले इसमें प्रतिदिन 940,000 बैरल की और कटौती कर दी गई है। पहले जहां साल 2026 में कुल खपत 103.29 mb/d रहने का अनुमान था, वह अब घटकर 102.44 mb/d रहने की उम्मीद है। एजेंसी के मुताबिक पिछले 60 सालों में तेल की मांग में आई यह चौथी सबसे बड़ी गिरावट है, जिसका सबसे ज्यादा असर एशिया के देशों पर पड़ने वाला है। हालांकि इसके उलट एजेंसी ने साल 2027 में प्रतिदिन 2.6 mb/d की रिकवरी होने की उम्मीद भी जताई है.
उत्पादन पर संकट और गल्फ देशों की स्थिति
तेल की आपूर्ति को लेकर भी हालात काफी गंभीर बने हुए हैं। अगस्त महीने में वैश्विक तेल का उत्पादन प्रतिदिन 1.6 mb/d घटकर 100.1 mb/d पर आ गया। सुरक्षा के खतरों की वजह से गल्फ देशों का 10 mb/d से ज्यादा का तेल उत्पादन अभी बंद पड़ा हुआ है। इसी वजह से IEA को गल्फ देशों में उत्पादन के सामान्य होने की उम्मीद को साल 2027 तक के लिए टालना पड़ा है। साल 2026 के लिए कुल तेल उत्पादन प्रतिदिन 5.7 mb/d घटकर 100.7 mb/d रहने का अनुमान है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के देशों में उत्पादन में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जो साल 2026 में प्रतिदिन 1.4 mb/d और साल 2027 में प्रतिदिन 1 mb/d जोड़ने का काम करेंगे.
फ्यूल की कीमतें और रिफाइनिंग पर असर
इन तमाम परेशानियों के बीच दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। सितंबर की शुरुआत में अमेरिका में डीजल की कीमतें प्रति बैरल $200 के पार चली गईं, जो युद्ध से पहले के स्तर से करीब 94% ज्यादा है। यूरोप और एशिया के बाजारों में भी कुछ इसी तरह की तेजी देखने को मिली है। रूस के बुनियादी ढांचे पर हमलों और गल्फ की सुविधाओं को पहुंचे नुकसान के कारण तेल साफ करने की क्षमता यानी रिफाइनिंग पर भी बुरा असर पड़ा है। अगस्त महीने में दुनिया भर से तेल का भंडार 95 मिलियन बैरल कम हो गया, और फरवरी के बाद से कुल मिलाकर 507 मिलियन बैरल तेल का स्टॉक कम हो चुका है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर की रिफाइनिंग प्रणालियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और बाजार को संभालने के लिए जल्द से जल्द शांति समझौते की जरूरत है। Gulfhindi.com की रिपोर्ट के मुताबिक, इन हालातों का सीधा असर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां से यात्रा करने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है क्योंकि आने वाले दिनों में यात्रा और परिवहन का खर्च बढ़ सकता है।