Imran Khan: पाकिस्तान की सियासत में फिर गरमाया मामला, इमरान खान की बहन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की नई अवमानना याचिका.

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन उजमा खान ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस्लामाबाद से सामने आई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए नई अवमानना याचिका दायर की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मौजूदा मामले में यह उनकी दूसरी ऐसी याचिका है, जिससे जेल प्रशासन और सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से पाकिस्तान की राजनीति और न्यायपालिका के बीच चल रही खींचतान को सतह पर ला दिया है, जिसे आम लोग बहुत ही हैरानी से देख रहे हैं।
किन बड़े अधिकारियों को बनाया गया है प्रतिवादी
दायर की गई इस नई याचिका में पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई बड़े और असरदार अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। इनमें रावलपिंडी की मशहूर अदियाला जेल के अधीक्षक साजिद बैग, पंजाब प्रांत के जेल महानिरीक्षक मियांसालिक जलाल, गृह मंत्रालय के सचिव अहमद सरवर रजा और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के मुख्य आयुक्त सोहेल अशरफ का नाम शामिल है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतने बड़े पदों पर बैठे होने के बावजूद इन लोगों ने अदालत के आदेशों का सही से पालन नहीं करवाया है और लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है।
परिवार से मुलाकात और बच्चों से बातचीत पर रोक
उजमा खान ने अपनी याचिका में साफ तौर पर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को यह साफ निर्देश दिया था कि इमरान खान को उनकी बहनों से हर हफ्ते नियमित मुलाकात करने दी जाए और उनके बेटों से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की पूरी व्यवस्था की जाए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है और इन निर्देशों पर कोई अमल नहीं किया जा रहा है। उनका दावा है कि बीते मंगलवार को भी उनकी बहनों को जेल के अंदर जाकर इमरान खान से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। याचिका में यह भी बेहद अहम बात सामने आई है कि इमरान खान ने बीते मार्च महीने के बाद से अपने दोनों बेटों कासिम और सुलेमान से किसी भी तरह की बातचीत नहीं की है। अदालत के साफ निर्देश थे कि हफ्ते में कम से कम दो बार फोन पर बेटों से बातचीत कराई जाए, लेकिन आज तक इस पर कोई इंतजाम नहीं किया गया है, जिसके चलते परिवार काफी परेशान है।
पीटीआई पार्टी ने जेल प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
इमरान खान की राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इस पूरी घटना पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है और जेल प्रशासन के रवैये की जमकर आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि जब देश की अदालत के इतने स्पष्ट और कड़े आदेश आ चुके हैं, उसके बाद भी परिवार को मिलने से रोकना सीधे तौर पर न्यायपालिका के आदेशों का अपमान है और यह देश की कानून व्यवस्था पर बहुत बड़े सवाल खड़े करता है। पीटीआई के नेताओं ने जेल अधिकारियों से सख्त मांग की है कि वे बिना किसी देरी के इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को देश के कानून और अदालत के निर्देशों के मुताबिक उनके परिवार से मिलने की पूरी अनुमति दें, ताकि मानवीय आधार पर हालात सामान्य हो सकें।