भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता, 38 साल बाद भारतीय रक्षा मंत्री पहुंचे कोलंबो.

भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने 8 सितंबर 2026 को कोलंबो पहुंचकर इतिहास रच दिया है। यह पिछले 38 वर्षों में किसी भी भारतीय रक्षा मंत्री की श्रीलंका की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस तीन दिवसीय दौरे पर उनके साथ रक्षा और विदेश मंत्रालयों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और आपसी रक्षा सहयोग को और ज्यादा मजबूत करना है।
तीन नए रक्षा समझौतों पर होगी बात
श्रीलंका के विदेश मंत्री Vijitha Herath के अनुसार, इस अहम यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तीन विशेष रक्षा समझौतों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इनमें दोनों देशों के नेशनल कैडेट कोर के बीच सहयोग ज्ञापन, नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच आपसी सहयोग का समझौता, और श्रीलंका वायु सेना द्वारा संचालित एयर-डिफेंस हथियारों के रखरखाव में भारत की सहायता का प्रावधान शामिल है। रखरखाव का यह समझौता विशेष रूप से भारत द्वारा 2000 से 2006 के बीच आपूर्ति की गई 24 में से 6 ऐसी 40mm L70 एयर-डिफेंस तोपों के लिए है, जबकि बाकी 18 यूनिट्स का रखरखाव भारत पहले ही मुफ्त में कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की कड़ी को आगे बढ़ाना
यह पूरा दौरा प्रधानमंत्री Narendra Modi की 5 अप्रैल 2025 की कोलंबो यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित पांच साल के रक्षा-सहयोग समझौते की नींव पर आधारित है। उस समझौते में कार्मिकों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और उपकरण रखरखाव जैसी चीजें शामिल थीं। इस मौजूदा कूटनीतिक मिशन के तहत भारतीय नौसेना का स्टीथ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट INS Udaygiri भी कोलंबो बंदरगाह पर पहुंच गया है, जहां क्षमता से परिचय और संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास किए जा रहे हैं।
रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा
यह कूटनीतिक जुड़ाव उस दौर की निरंतरता है जो अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake की बैठक से शुरू हुआ था। तब दोनों नेताओं ने माना था कि उनके सुरक्षा हित आपस में जुड़े हुए हैं। हालांकि इन पहलों का मकसद दोनों सेनाओं के बीच काम करने के तौर-तरीकों को बेहतर बनाना है, लेकिन अधिकारियों ने साफ किया है कि इन समझौतों में किसी भी तरह के स्थायी सैन्य अड्डे या आपसी रक्षा गठबंधन जैसी कोई बात शामिल नहीं है। इस यात्रा का उद्देश्य केवल संस्थागत संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय रणनीतिक हितों को साधना है।