रियाद हवाई अड्डे पर मिसाइल हमले के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र से खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा की मांग की
रियाद हवाई अड्डे पर हूती हमले में भारतीय की मौत के बाद भारत ने UN से GCC देशों में भारतीयों की सुरक्षा की मांग की है।

न्यूयॉर्क: रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए घातक मिसाइल हमले के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से खाड़ी देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। मध्य पूर्व पर हुई एक खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि भारतीय प्रवासियों की भलाई नई दिल्ली के लिए एक मुख्य राष्ट्रीय हित का विषय है।
यह हमला 10 अक्टूबर को हुआ था जब यमन के हूती बलों द्वारा दागी गई एक मिसाइल ने हवाई अड्डे को निशाना बनाया। इस हमले में हैदराबाद के मेहदीपटनम के रहने वाले 46 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल मोहम्मद यूसुफ अली की मौत हो गई। वह पिछले दस साल से रियाद में काम कर रहे थे और अपने परिवार के साथ उमराह यात्रा पर जा रहे थे, तभी मलबे की चपेट में आने से उनकी जान चली गई।
इस हादसे में उनके 18 वर्षीय बेटे अमन अली और 16 वर्षीय वसी अली घायल हुए हैं। अमन की घुटने की सर्जरी हुई है, जबकि वसी की तीन उंगलियां कट गई हैं। उनकी पत्नी समीरा, 11 वर्षीय बेटी मरियम और एक चाची को भी चोटें आई हैं। इस हमले में सऊदी अरब, अमेरिका, मिस्र और बांग्लादेश के नागरिकों सहित कुल 13 लोगों की मौत हुई है। 12 अक्टूबर को रियाद में मोहम्मद यूसुफ अली की नमाज-ए-जनाजा हुई, जिसमें भारतीय राजदूत भी शामिल हुए।
सुरक्षा कारणों से एयर इंडिया, इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर जैसी भारतीय एयरलाइनों ने 17 अक्टूबर तक रियाद, जेद्दा, दम्माम और मदीना की उड़ानें निलंबित कर दी थीं। रियाद में भारतीय दूतावास ने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें सतर्क रहने और कतर, कुवैत या बहरीन के जरिए वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की सलाह दी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रभावित परिवारों को पूरी सरकारी सहायता देने का भरोसा दिया है।
राजदूत हरीश ने समुद्री जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी, एमटी पेट्रो डॉल्फिन और एमटी वाल्थेरा जैसे जहाजों पर हुए हमलों को कानूनी और नैतिक रूप से गलत बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित 'सीफेरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' का जिक्र किया, जो संकट के समय अलर्ट और चिकित्सा सहायता प्रदान करेगा।
भारत ने सऊदी अरब के प्रति अपना समर्थन और यमन की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की बात दोहराई है। साथ ही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा को जरूरी बताया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए भारतीय मिशन आपातकालीन हेल्पलाइन चला रहे हैं और लोगों की वापसी के लिए समन्वय कर रहे हैं।