नेपाल बाढ़ पर भारत की मदद, भेजी गई राहत सामग्री, कई भारतीय भी लापता.

नेपाल में आए भीषण बाढ़ और भूस्खलन के संकट से निपटने के लिए भारत ने अपना मानवीय समर्थन और तेज कर दिया है। गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को भारत की तरफ से राहत सामग्री का दूसरा विमान नेपाल भेजा गया, जिसमें खाद्य पैकेट और जरूरी दवाइयां शामिल थीं। इस आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिसके बाद भारत सरकार ने अपने पड़ोसी देशों को सबसे पहले मदद देने की नीति के तहत यह सहायता पहुंचाई है।
भारतीय वायुसेना का विमान पहुंचा रहा है राहत सामग्री
भारतीय वायुसेना के C-130J ट्रांसपोर्ट विमानों का इस्तेमाल इस राहत कार्य को तेजी से अंजाम देने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले बुधवार, 26 अगस्त 2026 की रात को भी राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल पहुंचाई जा चुकी है। भारत की यह त्वरित कार्रवाई संकट के समय नेपाल के नागरिकों को संबल देने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की और उन्हें हरसंभव मानवीय मदद देने का पूरा भरोसा दिलाया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि भारत लगातार नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है और राहत कार्यों में पूरा सहयोग जारी रखेगा।
बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही और मौतों का आंकड़ा
यह संकट 26 अगस्त 2026 को तब शुरू हुआ जब तिब्बत और चीन की सीमा से लगे इलाकों में भयानक फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआत में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप समझा गया था, लेकिन बाद में पता चला कि यह 5.2 तीव्रता का भूस्खलन था जिसके साथ भयंकर बाढ़ भी आई थी। इस आपदा की वजह से मरने वालों की संख्या कम से कम 160 से 165 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, नेपाल और तिब्बत में 1,300 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें अकेले नेपाल के 826 लोग शामिल हैं।
लापता भारतीयों के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर
इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 133 भारतीय नागरिक भी लापता या संपर्क से बाहर हैं, जिनमें तमिलनाडु के 37 लोग भी शामिल हैं। नेपाल में भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 जारी किए हैं। बुनियादी ढांचे को भी बहुत नुकसान पहुंचा है, जिसमें कई घर, पुल और रास्ते पूरी तरह से टूट चुके हैं। इसके अलावा कम से कम 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी भारी क्षति पहुंची है। इस संकट की घड़ी में अंतरराष्ट्रीय संगठन और देश जैसे कि अमेरिका, चीन, विश्व स्वास्थ्य संगठन और रेड क्रॉस सोसाइटी भी राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।