भारत ने नेपाल को भेजा 21.5 टन राहत सामग्री, बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद लगातार जारी.

Aanya3 September 20262 min read33 viewsIndia
भारत ने नेपाल को भेजा 21.5 टन राहत सामग्री, बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद लगातार जारी.

भारत सरकार की तरफ से नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार रात काठमांडू में छठे और सातवें राहत विमान पहुंचे हैं, जिन्होंने कुल 21.5 टन जरूरी सामान नेपाल पहुंचाया है। इस खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल हैं जिनका उपयोग बचाव और खोज अभियानों में किया जा रहा है। इस ताजा मदद के बाद भारत की तरफ से नेपाल भेजे गए कुल राहत सामान की मात्रा बढ़कर 74 टन हो गई है।

विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की पुष्टि की है कि यह सहायता आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के लिए भेजी गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान में भारत की एक 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भी शामिल है जो डीएनए एनालिसिस और शवों की पहचान करने में स्थानीय प्रशासन की मदद कर रही है। इसके साथ ही डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल एक्सपर्ट्स की एक तकनीकी टीम भी नेपाल सरकार को सहयोग दे रही है ताकि हालात पर जल्द से जल्द काबू पाया जा सके।

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भारी तबाही और जान-माल का नुकसान

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की तरफ से 3 सितंबर 2026 को दी गई आधिकारिक कूटनीतिक जानकारी के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 को आए ग्लेशियर फटने और भयानक भूस्खलन के कारण देश में भारी तबाही मची है। इस आपदा में अब तक कम से कम 1,259 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से लगभग 65,000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जिनमें करीब 22,000 बच्चे शामिल हैं जिन्हें तुरंत पीने के पानी और स्वच्छता से जुड़ी सहायता की सख्त जरूरत है।

भारत और नेपाल के बीच लगातार समन्वय

भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल सरकार के साथ मिलकर राहत कार्यों को आगे बढ़ाने और हरसंभव मदद जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में बाढ़ और लैंडस्लाइड की वजह से कुल 35 मोटर योग्य पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। संपर्क व्यवस्था को फिर से बहाल करने के लिए भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज देने की भी पेशकश की है ताकि प्रभावित इलाकों तक पहुंचना आसान हो सके और लोगों को राहत पहुंचाई जा सके।

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