नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत ने भेजी 57.5 टन राहत सामग्री, अब तक 538 लोगों की मौत.

नेपाल में हाल ही में आए विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद भारत सरकार ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। भारत की तरफ से नेपाल को राहत सामग्री भेजने का सिलसिला लगातार जारी है और इसी कड़ी में शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को तीसरा जत्था भी भेज दिया गया। भारत ने इस आपदा के समय मानवीय सहायता के रूप में कुल 57.5 टन राहत सामग्री नेपाल को पहुंचाई है, जिससे वहां के जरूरतमंद लोगों को बड़ी राहत मिल सके। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।
बाढ़ से नेपाल में भारी तबाही और नुकसान
नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को अचानक आए भयंकर बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 538 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, आपदा के बाद से करीब 977 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस संकट की घड़ी की पूरी स्थिति को समझने के लिए ReliefWeb Report पर पूरी जानकारी उपलब्ध है।
तीन चरणों में भेजी गई राहत सामग्री
भारत सरकार की तरफ से यह सहायता तीन अलग-अलग चरणों में पूरी ईमानदारी के साथ पहुंचाई गई है। पहले चरण में 26 अगस्त की शाम को 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी, जबकि दूसरे चरण में 27 अगस्त को 37.5 टन का बड़ा जत्था रवाना किया गया। इसके बाद तीसरे और अंतिम चरण में शुक्रवार को फिर से 10 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि दूसरे विमान में खाने के पैकेट और जरूरी दवाइयां भी भेजी गईं। इसके अलावा, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने 27 अगस्त को आधिकारिक रूप से नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़का राज पौडेल को यह राहत सामग्री सौंपी। इस पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी MEA Briefing में दी गई है।
भारत की तरफ से विशेष बचाव टीमों का प्रस्ताव
भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत ने नेपाल को केवल खाने-पीने का सामान ही नहीं, बल्कि विशेष सहायता देने का भी प्रस्ताव रखा है। इसमें नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी NDRF की टीमें, मेडिकल टीम और टनल रेस्क्यू टीम शामिल हैं, जिनकी एक एडवांस टीम पहले ही वहां पहुंच चुकी है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान को ठीक करने के लिए भारत ने बेली ब्रिज और प्रीफैब्रिकेटेड ट्रस ब्रिज देने की भी पेशकश की है। भारत सरकार नेपाल प्रशासन के साथ मिलकर वहां फंसे 200 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और तलाश के लिए लगातार संपर्क में है। वहीं, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने 28 अगस्त को बताया कि नेपाल अभी अपनी सुरक्षा एजेंसियों के जरिए ही खोज और बचाव अभियान चला रहा है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद को प्रधानमंत्री राहत कोष के जरिए भेजने का अनुरोध किया है।