नेपाल में भारी बाढ़ और तबाही के बाद भारत की बड़ी मदद, भेजी गई स्पेशल रेस्क्यू टीम.

नेपाल में आए भीषण फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है, जहां लोगों की सुरक्षा और बचाव के लिए भारत सरकार ने अपनी मानवीय सहायता को और ज्यादा बढ़ा दिया है। भारत ने नेपाल की मदद के लिए एक खास 11-सदस्यीय специализирован मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम के साथ-साथ एक रिकॉनेसांस यानी टोही दल को भी रवाना किया है, जो शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को भारतीय वायुसेना की तीसरी राहत उड़ान के जरिए नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचा। इस कदम के साथ ही भारत ने केवल जरूरी सामान भेजने के बजाय अब सीधे तौर पर खतरनाक और जोखिम भरे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में अपना सहयोग देना शुरू कर दिया है, ताकि जलमग्न और सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
नेपाल के अनुरोध पर बढ़ाई गई तकनीकी मदद
यह राहत अभियान नेपाल सरकार के उस आधिकारिक अनुरोध के बाद और तेज हुआ है, जिसमें स्थानीय स्तर पर बचाव कार्य करने के बाद यह महसूस किया गया कि आपदा का दायरा बहुत बड़ा है और इसके लिए भारतीय तकनीकी विशेषज्ञता की सख्त जरूरत है। खासकर उन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जिन्हें हाइड्रोपावर टनल यानी पनबिजली सुरंगों के अंदर फंसा हुआ माना जा रहा है, भारतीय दल अपनी खास तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है। विदेश मंत्रालय और आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, 28 अगस्त तक भारत द्वारा भेजी गई कुल राहत सामग्री का वजन बढ़कर 57.5 टन पहुंच चुका है। इसमें पहली खेप के तौर पर 26 अगस्त को 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी, इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन वजन की दूसरी खेप पहुंचाई गई और तीसरी उड़ान के जरिए आखिरी 10 टन सामग्री भेजी गई, जिसमें पोर्टेबल जनरेटर, पानी शुद्ध करने वाली टैबलेट, खाने के पैकेट और डिग्निटी किट्स शामिल थीं। इसके अलावा, भारत ने नेपाल को संपर्क व्यवस्था यानी कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए बेली ब्रिज और तकनीकी टीमें देने की भी पेशकश की है, और टोही दल इस समय जमीन पर जाकर विशेष सुरंग बचाव उपकरणों की जरूरतों का आकलन कर रहा है।
लापता भारतीयों और राहत कार्यों का पूरा ब्योरा
इस प्राकृतिक आपदा की वजह से कई लोगों के प्रभावित होने की खबर है, जिसमें लगभग 320 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं और भारतीय मूल के लगभग 100 लोग भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत कार्यों की शुरुआत में, त्रिशूली 1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे 63 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि नेपाली सेना की मदद से 21 भारतीय तीर्थयात्रियों को उनके घर वापस भेज दिया गया। इसके अलावा, भूस्खलन के कारण चीन की सीमा की तरफ लगभग 400 भारतीय नागरिक फंस गए थे, जिनमें से 96 लोग सफलतापूर्वक नेपाल की सीमा पार कर चुके हैं और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास बाकी बचे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के काम में लगातार जुटा हुआ है। इस पूरे हालात पर बात करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि भारत खोज और बचाव अभियान के पूरे दौर के दौरान काठमांडू का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और नेपाल को किसी भी तरह की परेशानी में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा, जिसकी विस्तृत जानकारी ANI News और विदेश मंत्रालय की आधिकारिक ब्रीफिंग में दी गई है।