भारतीय नाविक पॉल जस्टिन की ईरान की जेल से नौ महीने बाद हुई रिहाई, सुनाई आपबीती.

तमिलनाडु के रहने वाले 27-year-old भारतीय नाविक Paul Justin ने ईरान की बंदर अब्बास जेल में अपनी नौ महीने की लंबी कैद के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। वह पलाउ के झंडे वाले टैंकर MV Harbour Phoenix पर ओइलर के रूप में काम कर रहे थे। इराक से ओमान जाते समय जब जहाज में कोई तकनीकी खराबी आ गई, तो उसके बाद उन्हें और उनके साथियों को हिरासत में ले लिया गया था। इस घटना ने एक बार फिर फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में सफर करने वाले नाविकों के सामने आने वाले खतरों को उजागर कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय पानी में रोका गया था जहाज
14 July 2025 को ईरानी नौसेना के जवानों ने इस जहाज को अंतरराष्ट्रीय पानी में रोक लिया था और बाद में इसे जास्क बंदरगाह ले जाया गया था। चालक दल के सदस्यों को जहाज के कार्गो क्षेत्र में लगभग 10 दिनों तक हथकड़ी लगाकर रखा गया था। इस दौरान डीजल तस्करी के आरोपों को लेकर उनसे लगातार पूछताछ की गई, जिसे चालक दल और जहाज के ऑपरेटर दोनों ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद सभी को बंदर अब्बास जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां पॉल जस्टिन ने नौ महीने और सात दिन बिताए।
भारी जुर्माना और जेल की सजा
इस जहाज पर कुल 16 लोगों का चालक दल सवार था, जिसमें 10 भारतीय, तीन पाकिस्तानी, दो इंडोनेशियाई और एक तंजानियाई नागरिक शामिल था। एक अदालत ने इन सभी को पांच-पांच साल की जेल की सजा सुनाई और साथ ही प्रत्येक व्यक्ति पर 7.5 million US dollars का भारी वित्तीय जुर्माना भी लगाया। हिरासत के दौरान वहां का माहौल बहुत खराब था और जस्टिन को काफी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। जेल में रहने के दौरान वह चिकन पॉक्स की बीमारी से भी पीड़ित हो गए थे और उनके पास अपने परिवार से बात करने के लिए बहुत सीमित और महंगे विकल्प ही बचे थे।
सैन्य संघर्ष और तनाव का माहौल
साल 2026 की शुरुआत में जैसे-जैसे क्षेत्रीय सैन्य संघर्ष और ज्यादा बढ़ गए, वैसे-वैसे वहां का तनाव भी लगातार बढ़ता चला गया। जस्टिन ने बताया कि उन्होंने जेल के पास ही लगातार हो रहे विस्फोटों और मिसाइल गतिविधियों की आवाज़ों को सुना था, जिससे उनकी चिंताएं और ज्यादा बढ़ गई थीं। Gulf के इस क्षेत्र में नाविकों के लिए सुरक्षा का मुद्दा हमेशा से एक बड़ा विषय रहा है, क्योंकि इस रूट पर जहाजों को जब्त किए जाने और हिरासत में लिए जाने का जोखिम हमेशा बना रहता है।
कूटनीतिक प्रयासों के बाद हुई वतन वापसी
भारत के Directorate General of Shipping ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी कि 26 May 2026 को सभी 10 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया। यह रिहाई विदेश मंत्रालय, तेहरान में भारतीय दूतावास, शिपिंग अधिकारियों, आरपीएसएल कंपनी और जहाज प्रबंधकों के बीच लगातार चले कूटनीतिक प्रयासों के बाद संभव हो पाई। इसके बाद पॉल जस्टिन जून 2026 में अपने घर दक्षिण भारत लौट आए। डीजी शिपिंग हमेशा से भारतीय नाविकों के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र बनाकर रखता है, जिसके तहत नाविकों को किसी भी समस्या की जानकारी सबसे पहले अपनी आरपीएसएल एजेंसी, अपने मालिक या शिपऑनर की शिकायत समिति को देनी होती है।