UAE सड़क हादसे में भारतीय सुपरवाइज़र की मौत, उम्म अल क्वैन जाते समय हुआ दर्दनाक सड़क हादसा

Praggya Singh sabal27 August 20264 min read50 viewsUAE
UAE सड़क हादसे में भारतीय सुपरवाइज़र की मौत, उम्म अल क्वैन जाते समय हुआ दर्दनाक सड़क हादसा

यूएई में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। 17 अगस्त 2026 को यूएई के उम्म अल क्वैन में एक भीषण सड़क हादसे में 35 साल के एक भारतीय नागरिक की जान चली गई। इस दर्दनाक हादसे में चार अन्य सहकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई या फिर उनके इलाज की प्रक्रिया चल रही है। यह हादसा तब हुआ जब सभी कर्मचारी एक मिनीबस में सवार होकर अपने घर से काम की जगह पर जा रहे थे। इस घटना के बाद से यूएई में काम करने वाले प्रवासियों की सुरक्षा और सफर के दौरान होने वाले हादसों को लेकर चिंताएं एक बार फिर से बढ़ गई हैं। मृतक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उनके रिश्तेदार तथा जानने वाले इस घटना से गहरे सदमे में हैं।

अचानक ड्राइवर की तबीयत बिगड़ने से हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, मृतक भारतीय नागरिक का नाम Jason था और वह मूल रूप से भारत के Kerala राज्य के रहने वाले थे। वह पिछले पांच साल से अधिक समय से यूएई में रह रहे थे और अजमान की एक कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी में सुपरवाइज़र के तौर पर काम कर रहे थे। घटना के दिन वह अजमान स्थित अपने आवास से उम्म अल क्वैन में मौजूद एक वर्कसाइट पर जाने के लिए निकले थे। जिस मिनीबस से वे यात्रा कर रहे थे, उसमें करीब 14 कर्मचारी सवार थे और जैसन वाहन की अगली यात्री सीट पर बैठे हुए थे। खलीज टाइम्स से बातचीत के दौरान सोशल वर्कर Salim Noor ने बताया कि गाड़ी चला रहे ड्राइवर की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद वह गाड़ी से अपना नियंत्रण खो बैठे और मिनीबस सीधे सड़क के डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन में बैठे लोगों को गंभीर चोटें आईं।

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घायलों का इलाज और परिवार की स्थिति

इस सड़क दुर्घटना में चार अन्य कर्मचारी भी घायल हो गए, जिनमें से एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई है। संबंधित कंपनी द्वारा उस घायल कर्मचारी को भारत वापस भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि वह अपने देश में रहकर बेहतर मेडिकल देखभाल प्राप्त कर सके। अन्य घायल कर्मचारियों को शुरुआती इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मृतक जैसन अपने पीछे अपनी पत्नी को छोड़ गए हैं, जिन्होंने हाल ही में यूएई आने के बाद शारजाह के एक क्लिनिक में नर्सिंग की नौकरी हासिल की थी। इस दंपती के दो छोटे बच्चे हैं जिनकी उम्र 3 और 6 साल है और वे भारत में ही रहते हैं। कानूनी और कांसुलर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जैसन का पार्थिव शरीर केरल के तिरुवनंतपुरम भेज दिया गया और उनकी पत्नी भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत लौट गईं।

यूएई के श्रम कानून और मुआवजे के नियम

यूएई के श्रम दिशा-निर्देशों के अनुसार, घर और कार्यस्थल के बीच के सीधे रास्ते पर होने वाली आने-जाने की दुर्घटनाओं को काम से जुड़ी चोटों यानी वर्क-रिलिटेड इंजरी के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इस तरह के वर्गीकरण के तहत पात्र परिवार के सदस्यों को मृतक कर्मचारी के 24 महीने के मूल वेतन के बराबर मुआवजा मिल सकता है, जिसकी सीमा 18,000 दिरहम से लेकर 200,000 दिरहम के बीच तय की गई है। इसके अलावा उन्हें सेवा समाप्ति के लाभ यानी एंड-ऑफ-सर्विसेज बेनिफिट्स भी दिए जाते हैं। नियोक्ताओं की यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वे काम से जुड़ी चोटों के लिए चिकित्सा उपचार की लागत को पूरा करें और मानव संसाधन और एमिरिटाइजेशन मंत्रालय के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ऐसी घटनाओं की पूरी रिपोर्ट दर्ज करें।

प्रवासी श्रमिकों की परिवहन सुरक्षा पर उठे सवाल

यह दुखद सड़क हादसा इसी साल जून के महीने में अमीरात रोड पर हुई एक अन्य दुर्घटना के बाद सामने आया है, जिसमें एक मिनीबस के दुर्घटनाग्रस्त होने से छह भारतीय नागरिकों सहित कुल सात लोगों की मौत हो गई थी। इन लगातार हो रही घटनाओं ने यूएई में श्रमिक परिवहन सुरक्षा, चालकों की फिटनेस और गाड़ियों के रखरखाव को लेकर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले हजारों भारतीय मजदूर हर दिन काम पर जाने के लिए इसी तरह की परिवहन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में इस तरह के हादसे न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हैं बल्कि परिवारों को कभी न भरने वाला दर्द भी दे जाते हैं। स्थानीय प्रशासन और कंपनियां अब इस बात पर जोर दे रही हैं कि चालकों के स्वास्थ्य और वाहनों की स्थिति की नियमित जांच की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाओं को रोका जा सके।

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