Iran News: ईरान के बासिज प्रमुख ने की अमेरिका से अपील, पुराने समझौते पर लौटने की रखी मांग.

ईरान के बासिज अर्धसैन्य बल के प्रमुख ने अमेरिका से सार्वजनिक रूप से अपील की है कि वह पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से तैयार किए गए पुराने समझौता ज्ञापन यानी MoU पर वापस लौट आए। यह बयान 4 सितंबर 2026 को सामने आया है, जिससे तेहरान के भीतर चल रही उस बहस को और हवा मिल गई है जिसमें यह सोचा जा रहा है कि अमेरिका के साथ कूटनीतिक समझौता किया जाए या फिर सैन्य टकराव का रास्ता अपनाया जाए। इस पूरे घटनाक्रम पर आम लोगों और दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक शांति और सुरक्षा पर सीधा पड़ता है।
समझौते का इतिहास और उसकी शर्तें
यह समझौता ज्ञापन इसी साल यानी जून 2026 के बीच में साइन हुआ था। इसका मुख्य मकसद संघर्ष विराम को बढ़ावा देना और युद्ध की शुरुआत के बाद 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया को शुरू करना था। आपको बता दें कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल की सेना ने तेहरान पर हवाई हमले किए थे जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। इस तय समझौते के तहत ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगों को हटाना था और जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू होने देना था। इसके बदले में अमेरिका को अपनी नौसेना की नाकाबंदी खत्म करनी थी, तमाम प्रतिबंध हटाने थे, ईरानी तेल निर्यात के लिए विशेष छूट देनी थी और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए एक खास पैकेज तैयार करना था। लेकिन दोनों देशों के बीच हमले दोबारा शुरू होने की वजह से यह समझौता कुछ ही हफ्तों के भीतर पूरी तरह से टूट गया था।
अमेरिका और ईरान के नेताओं के नए बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर 8 जुलाई 2026 को इस समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया था और अगस्त आते-आते यह पूरी तरह से समाप्त हो गया। इसके बावजूद ईरान के शीर्ष नेताओं की तरफ से लगातार अमेरिका पर पुराना समझौता लागू करने का दबाव बनाया जा रहा है। किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान 1 सितंबर 2026 को ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि अगर अमेरिका अपने वादों पर वापस लौटता है तो ईरान भी तुरंत वैसा ही जवाब देगा। इसके अलावा, विदेश मंत्री Araghchi ने भी 31 अगस्त को इसी बात को दोहराया था और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने अमेरिका पर अपने वादों को पूरा न करने का गंभीर आरोप लगाया है।
तनाव के बीच आगे की स्थिति
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साफ कर दिया कि वह अब किसी भी नई बातचीत के मूड में नहीं हैं। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण और ईरान की खराब होती अर्थव्यवस्था का हवाला दिया। इसके बाद 28 अगस्त 2026 को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव Mohsen Rezaei ने कड़ी चेतावनी दी कि अगर समुद्री नाकाबंदी यूं ही जारी रही तो ईरान अमेरिका के आर्थिक हितों को निशाना बनाएगा। इन सबके बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar का यह लगातार कहना है कि जून महीने वाले समझौते को पूरी तरह से लागू करना ही इस चल रहे संघर्ष को खत्म करने का इकलौता रास्ता बचा है।