हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा दावा, कहा- बिना इजाजत कोई जहाज नहीं गुजरेगा

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने यह दावा किया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका पूरी तरह से नियंत्रण है। इस रणनीतिक रास्ते से किसी भी जहाज को बिना तेहरान की सीधी अनुमति के गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ईरान के इस कड़े रुख के बाद से खाड़ी देशों में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है, जिससे वहां सफर करने वाले और कारोबार से जुड़े लोगों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
ईरान के इस ऐलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 27 अगस्त 2026 को यह साफ किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी खुला हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने इससे पहले ईरान द्वारा बिछाए गए समुद्री बारूदों को सफलतापूर्वक हटा दिया है। एडमिरल ब्रैड कूपर ने यह भी जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने पिछले कुछ महीनों के दौरान लगभग 1,500 कमर्शियल जहाजों को इस इलाके से सुरक्षित पार कराया है।
ईरान की शर्तें और नए प्रतिबंध
28 अगस्त 2026 को ईरान ने पूर्ण ट्रैफिक बहाली के लिए अपनी शर्तें रखने की इच्छा जताई है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने कहा कि इन शर्तों के तहत क्षेत्रीय युद्ध को खत्म करना होगा और वाशिंगटन को तेहरान की मांगों को पूरा करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। वहीं दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने चल रही बातचीत को रचनात्मक बताया है, हालांकि विदेश मंत्रालय ने 28 अगस्त को अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों को राज्य समर्थित आतंकवाद करार दिया है।
अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन और जहाजों की आवाजाही पर असर
केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, 27 अगस्त को इस जलडमरूमध्य से केवल 5 से 7 जहाज ही गुजरे, जो कि पिछले 10 दिनों के औसत 15 जहाजों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर यानी UKMTO ने बताया कि जुलाई की शुरुआत से लेकर अब तक 23 प्रोजेक्टाइल हमलों में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज क्षतिग्रस्त हुए हैं। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने मध्यस्थता करने और नेविगेट करने की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देने के लिए 27 अगस्त को तेहरान का दौरा किया था, लेकिन ईरान अभी भी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी UNCLOS के अंतरराष्ट्रीय मानकों को चुनौती दे रहा है, जो सभी जहाजों को पारगमन मार्ग की गारंटी देता है। इस पूरी स्थिति के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप UNI India की रिपोर्ट देख सकते हैं।