Strait of Hormuz: ईरान का बड़ा दावा, अमेरिका और इसराइल के हमलों से पहले बिल्कुल खुला था होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 6 सितंबर 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz पूरी तरह से खुला हुआ था और वहां से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से चल रही थी। यह स्थिति तब तक बनी रही जब तक अमेरिका और इसराइल ने मिलकर 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हवाई हमले नहीं किए। इस सैन्य कार्रवाई को Operation Epic Fury नाम दिया गया था, जिसके तहत ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु संयंत्रों और देश के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei सहित कई प्रमुख नेतृत्व को निशाना बनाया गया था। इन हमलों के बाद ही ईरान ने इस बेहद अहम समुद्री रास्ते को बंद करने का कड़ा फैसला लिया।
अमेरिका और इसराइल पर लगाए गंभीर आरोप
ईरान के अधिकारी ने अमेरिका पर सीधा हमला बोलते हुए इसे एक गैर-कानूनी और क्रूर युद्ध करार दिया है। उनका कहना है कि वाशिंगटन की यह सोच पूरी तरह से गलत है कि इस वैश्विक तेल व्यापार के ठप होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैली अशांति की कीमत पूरी दुनिया चुकाएगी। यह पूरा विवाद तब और ज्यादा गहरा गया जब 5 सितंबर 2026 को अमेरिकी फौजों ने ईरान से जुड़े तीन तेल टैंकरों पर हमला कर दिया। इसके जवाब में ईरान ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए छह जहाजों को रोकने का ऐलान किया, जिनमें तीन ऐसे तेल टैंकर भी शामिल थे जो होर्मुज जलडमरूमध्य के अंदर बिना अनुमति वाले रास्तों पर चल रहे थे। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए 7 सितंबर 2026 तक इस जलमार्ग को दोबारा खोलने का अल्टीमेटम दिया है और ऐसा न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही है।
ईरान की दो टूक और सुरक्षा परिषद का रुख
ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव Mohsen Rezaei ने 6 सितंबर 2026 को साफ कर दिया कि होर्मुज जलमार्ग अब पूरी तरह से बंद है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें रास्ते के खुले होने की बात कही जा रही थी और इसे एक बड़ा झूठ बताया। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आने वाले दिनों में ईरान इस जलडमरूमध्य के पास एक प्रतिबंधित क्षेत्र बनाएगा, जो अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी लाइन से लेकर फारस की खाड़ी के कुछ हिस्सों तक फैला होगा और वहां आने वाले जहाजों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा, खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने भी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी नौसेना की ओर से जहाजों की आवाजाही को रोकने की कोशिश जारी रही, तो अमेरिकी युद्धपोतों पर और भी ज्यादा तेज और बड़े हमले किए जाएंगे।
संसद और सैन्य अधिकारियों की चेतावनी
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब संभलकर जवाब देने का दौर खत्म हो चुका है और आने वाले दिनों में और भी कड़ा बदला लिया जाएगा। उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पुष्टि की है कि वे इस समुद्री इलाके में अपनी नाकाबंदी को सख्ती से लागू कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में 92 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है, 3 जहाजों को निष्क्रिय किया है और 2 जहाजों पर बोर्डिंग की है। CENTCOM के कमांडर एडमिरल Brad Cooper ने चेतावनी दी है कि अगर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाएगा, तो अमेरिका उसके बदले में तीन ईरानी जहाजों को रोककर आर्थिक नुकसान पहुंचाएगा। इसके साथ ही, वाना न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े 56 टैंकरों को प्रतिबंधित जहाजों की काली सूची में डाल दिया है, जिससे खाड़ी देशों में तनाव लगातार चरम पर पहुंच गया है और वहां काम करने वाले प्रवासियों तथा भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं।