Iran Crude Export: अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का बड़ा दावा, कहा- अभी भी जारी है क्रूड ऑयल का निर्यात.

ईरान के पेट्रोलियम मंत्री Mohsen Paknejad ने 3 सितंबर 2026 को यह पुष्टि की है कि उनका देश अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और नाकाबंदी के बावजूद offshore waters में अपने ग्राहकों को लगातार कच्चे तेल की डिलीवरी कर रहा है। हालांकि मंत्री ने यह स्वीकार किया कि पिछले कुछ समय में निर्यात की मात्रा में जरूर गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद तेल भेजने की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह से सक्रिय है। उन्होंने अपने दुश्मनों या विरोधियों द्वारा इस जानकारी का गलत फायदा उठाने की आशंका जताते हुए किसी भी तरह की खास या बारीक जानकारी देने से पूरी तरह मना कर दिया।
अमेरिका की तरफ से बनाया जा रहा है अधिकतम दबाव
ईरान की तरफ से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी पाबंदियों को और ज्यादा कड़ा कर दिया है। अमेरिका के ऊर्जा सचिव Chris Wright ने 2 सितंबर 2026 को यह ऐलान किया था कि उनका देश ईरान और उसके आर्थिक सहयोगियों पर लगाम कसने के लिए पूरी तरह से अधिकतम दबाव की रणनीति अपनाएगा। इस नई योजना के तहत अमेरिका शैडो बैंकिंग नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी के चैनलों और उन सभी जहाजों को निशाना बना रहा है जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का मुख्य उद्देश्य तेहरान की सरकार को अरबों डॉलर के राजस्व तक पहुंचने से रोकना है ताकि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सके।
कच्चे तेल की सप्लाई में आई है भारी गिरावट
कमोडिटी एनलिटिक्स फर्म Kpler से मिले आंकड़ों के मुताबिक ईरान से कच्चे तेल की लोडिंग में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि ईरान का क्रूड एक्सपोर्ट घटकर अब मात्र 260,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया है, जबकि ठीक एक साल पहले यह आंकड़ा 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन हुआ करता था। इन आंकड़ों के उलट ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Fars News Agency ने 3 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि देश ने 2 सितंबर को समाप्त हुए 11 दिनों के छोटे से अंतराल में ही 1 अरब डॉलर से ज्यादा का तेल राजस्व कमाया है। ऐसा माना जा रहा है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अधिक होने की वजह से ईरान को यह फायदा मिला है।
समुद्री इलाकों में लगातार बढ़ रहा है तनाव
समुद्री रास्तों पर व्यापार और आवाजाही की स्थिति दिनों-दिन बेहद खतरनाक और अस्थिर होती जा रही है। जब से अमेरिका ने 14 जुलाई 2026 को दोबारा से नाकाबंदी लागू की है, तब से अमेरिकी बलों ने कुल 86 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है, नियमों का पालन न करने वाले 3 जहाजों को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया है और जांच के नाम पर 2 जहाजों पर बोर्डिंग भी की है। इसके अलावा, 31 अगस्त से शुरू हुई समुद्री झड़पों के बढ़ने के बाद CENTCOM ने 1 सितंबर को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC के ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले भी किए थे।
घरेलू मोर्चे पर आर्थिक और वित्तीय संकट
बाहरी पाबंदियों के साथ-साथ ईरान के अंदर भी वित्तीय और घरेलू स्तर पर बहुत बड़ा दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ईरान की करेंसी रियाल की कीमत गिरकर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी, जहां अगस्त के आखिर में खुले बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 20,000 tomans के पार निकल गई थी। इसके साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि देश के भीतर घरेलू ईंधन का स्टॉक आने वाले कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह से खत्म हो सकता है। इस बात को लेकर ईरानी सरकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बीच रणनीतिक रिजर्व से तेल या ईंधन निकालने को लेकर अंदरूनी विवाद भी शुरू हो गए हैं। भले ही तेहरान की तरफ से सार्वजनिक तौर पर अमेरिकी दबाव को पूरी तरह से खारिज किया जा रहा हो, लेकिन ईरान के ही वरिष्ठ सूत्रों ने इस बात को मान लिया है कि नाकाबंदी का सामना करना अब बहुत ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। शेल कंपनियों और बिना रजिस्ट्रेशन वाले टैंकरों जैसे पुराने तरीकों से प्रतिबंधों को बचाना अब बहुत महंगा साबित हो रहा है।