अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रस्ताव को ईरान के दूत ने बताया कानून के खिलाफ, परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ा तनाव.

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA में ईरान के दूत ने अमेरिका और ई3 देशों यानी ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी द्वारा तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट प्रस्ताव को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया है। IRNA News Agency के माध्यम से जारी किए गए बयान में ईरानी अधिकारी ने कहा कि यह कदम लगातार नियमों के खिलाफ उठाया जा रहा है और इससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है। यह पूरा मामला ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है जिस पर पश्चिमी देश लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
IAEA प्रमुख का बड़ा बयान और यूरेनियम का स्टॉक
बीते दिन IAEA के महानिदेशक Rafael Grossi ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को यह जानकारी दी कि एजेंसी ने ईरान की परमाणु सामग्री की निगरानी और उसकी जानकारी तक अपनी पहुंच पिछले एक साल से अधिक समय से खो दी है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि एजेंसी के पास अब जरूरी आंकड़े नहीं हैं जो गंभीर प्रसार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। एजेंसी के अनुमान के मुताबिक ईरान के पास इस समय लगभग 440.9 किलोग्राम यानी करीब 972 पाउंड यूरेनियम मौजूद है जिसे 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित किया गया है। यह स्तर तकनीकी रूप से हथियारों में इस्तेमाल होने वाले ग्रेड के बहुत करीब माना जाता है। हालांकि महानिदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही सैद्धांतिक रूप से इस मात्रा से परमाणु बम बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान ने असल में ऐसा कोई हथियार तैयार कर लिया है।
तेहरान का तीखा रुख और सुरक्षा चिंताएं
दूसरी तरफ ईरान की राजधानी तेहरान ने इस पूरे प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि जिस रिपोर्ट के आधार पर यह ड्राफ्ट तैयार किया गया है वह राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने याद दिलाया कि ईरान ने जून 2025 में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद अपनी परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निरीक्षकों की पहुंच को रोक दिया था। इसके अलावा वियना में स्थित ईरानी मिशन ने यह भी कहा कि यह पूरा कदम 'स्नैपबैक' कूटनीतिक रणनीति की नाकामी को छुपाने का एक तरीका मात्र है।
क्षेत्रीय अस्थिरता और आगे की कार्रवाई
यह तमाम कूटनीतिक उठापटक ऐसे समय में हो रही है जब पूरे इलाके में भारी तनाव बना हुआ है। हाल ही में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख Mohsen Rezaei ने दावा किया था कि उन्होंने एक अमेरिकी युद्धपोत के खिलाफ नई बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। वहीं दूसरी ओर IAEA का बोर्ड ऑफ गवर्नर्स अगले सप्ताह इस प्रस्ताव पर मतदान करने की तैयारी कर रहा है जिसके जरिए ईरान के परमाणु मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेजने का प्रयास किया जाएगा। इस दबाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी बीते 7 जून 2026 को सार्वजनिक रूप से ईरानी परमाणु बुनियादी ढांचों पर संभावित हमलों की चेतावनी दी थी जिससे आने वाले दिनों में स्थिति के और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।