ईरान के विदेश मंत्री का दावा, अमेरिका और इसराइल की जंग हुई फेल, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव.

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 28 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका और इसराइल की संयुक्त जंग बुरी तरह से विफल हो गई है। यह संघर्ष उस युद्ध की छठी महीने की बरसी पर आया जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। उन्होंने यह बात 40th International Islamic Unity Conference के दौरान कही और साफ किया कि इस्लामिक गणराज्य ने अमेरिका, इसराइली शासन और कई पश्चिमी देशों को हरा दिया है। इस बयान के बाद से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया है, खासकर उन भारतीयों के लिए जो रोजगार के सिलसिले में यूएई और अन्य खाड़ी देशों में रहते हैं।
अमेरिकी सैन्य अड्डों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का रुख
ईरानी विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे वास्तव में मेजबान देशों की सुरक्षा करने के बजाय केवल इसराइल की रक्षा करने का काम करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना एक बहुत बड़ी रणनीतिक गलती साबित हुई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान के खिलाफ हमले जारी रहे, तो अमेरिकी ठिकानों को वैध निशाना बनाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कूटनीति के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन इसके लिए अमेरिका को दबाव बनाने की अपनी नीतियां छोड़नी होंगी, आपसी विश्वास कायम करना होगा और अपने वादों को निभाना होगा। इससे पहले ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने भी 27 अगस्त को चेतावनी दी थी कि किसी भी अमेरिकी आक्रामकता का बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका की नई आर्थिक पाबंदियां और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संकट
एक तरफ जहां जुबानी जंग तेज है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने अपनी आर्थिक कार्रवाई को और अधिक सख्त कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 28 अगस्त को 'Operation Economic Outcast' की घोषणा की, जिसके तहत ईरान पर आर्थिक शिकंजा कसने के लिए नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन पाबंदियों में उन अमीराती बैंकों के खिलाफ भी संभावित कार्रवाई शामिल है जो ईरानी शासन से जुड़े हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा करते हुए इसे आर्थिक आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का यह दावा था कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह से खुला है और ईरान किसी समझौते की तलाश में है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत नजर आई। पिछले दिनों 27 अगस्त को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से हमला होने की खबर आई, जिसके बाद से कमोडिटी शिपिंग का ट्रैफिक भी काफी कम हो गया है।
कतर की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास
बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें लगातार जारी हैं। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने 27 और 28 अगस्त को तेहरान का दौरा किया। वहां उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और मौजूदा तनाव को कम करने तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति पर लंबी बातचीत की। खाड़ी देशों में इस तरह की हलचल से वहां काम करने वाले प्रवासी कामगारों और भारतीय समुदाय के लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं, क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य या आर्थिक संघर्ष का सीधा असर खाड़ी की अर्थव्यवस्था और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।