ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, मुस्लिम देशों से की अपील, मिलकर करें अमेरिका और इसराइल का सामना.

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने मुस्लिम देशों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की है। 28 अगस्त 2026 को आयोजित 40th International Islamic Unity Conference के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सभी इस्लामिक देशों को बड़े देशों की मनमानी और दबाव के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने मिस्र, लेबनान और अफ्रीकी देशों के साथ राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने की बात भी कही।
क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी अड्डों पर चेतावनी
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए ईरानी मंत्री ने साफ किया कि उनके देश की तरफ से आसपास के इलाकों में अमेरिकी ठिकानों पर जो सैन्य कार्रवाई की गई, वह सिर्फ आत्मरक्षा में थी। उन्होंने अमेरिका और इसराइल की तरफ से की गई आक्रामकता का जवाब देने की बात कही। साथ ही चेतावनी दी कि अगर वॉशिंगटन की तरफ से ईरान पर हमले जारी रहे, तो क्षेत्रीय देशों में बने अमेरिकी ठिकाने उनके निशाने पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा के लिए अमेरिका पर भरोसा करना एक बड़ी भूल है, क्योंकि वहां बने सैन्य अड्डे मेजबान देशों की बजाय सिर्फ इसराइल की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
ऊर्जा बाजारों में हेरफेर और प्रतिबंधों पर रुख
29 अगस्त 2026 को अपने बयानों को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अमेरिका सरकार के कुछ लोगों और इसराइल समर्थक ताकतों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये लोग इस संघर्ष को लंबा खींचने के लिए ग्लोबल एनर्जी मार्केट यानी वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हेरफेर कर रहे हैं। मीडिया की चालों का इस्तेमाल करके कीमतों को प्रभावित किया जा रहा है ताकि राष्ट्रपति Donald Trump इस हारने वाले युद्ध में फंसे रहें। इन तनावों के बावजूद उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक दबाव की नीति को बंद कर दे, ईरान के अधिकारों को माने और अपने वादों को पूरा करे, तो बातचीत का रास्ता फिर से खुल सकता है। उन्होंने सभी देशों से अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज करने की अपील भी की।
पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंध
क्षेत्रीय कूटनीति के बारे में बात करते हुए Abbas Araghchi ने मिस्र के साथ अपने पुराने संबंधों को फिर से जोड़ने की इच्छा जताई। इसके अलावा, लेबनान के सभी राजनीतिक दलों के साथ रिश्ते विकसित करने की बात कही, हालांकि उन्होंने लेबनान सरकार की कुछ नीतियों पर अपनी असहमति भी जताई। इससे पहले 27 अगस्त 2026 को उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani के साथ अहम बैठक की थी। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आने-जाने के रास्ते को फिर से खोलने के प्रयासों पर रचनात्मक चर्चा की गई।