BRICS Summit: ईरान के न्याय प्रमुख ने चीन के साथ मजबूत कानूनी रिश्ते बनाने का किया बड़ा ऐलान

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और चीन ने अपने रिश्तों को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 4 सितंबर 2026 को भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के साइडलाइन पर ईरान के न्याय प्रमुख غلامحسین محسنی اژهای (Gholamhossein Mohseni Ejei) ने चीन की सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट के अध्यक्ष झांग जुन (Zhang Jun) से खास मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयां देने पर विस्तार से चर्चा की गई। न्याय प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा कि उनका देश चीन के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि कानूनी और न्यायिक क्षेत्र में आपसी मेलजोल दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक रिश्तों की नींव बनता है।
ब्रिक्स देशों के बीच कानूनी अनुभव का आदान-प्रदान
मुलाकात के दौरान ईरानी न्याय प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स समूह के सभी देशों को अपने कानूनी अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा करने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर चीन के अनुभवों को ईरान के साथ मिला दिया जाए, तो इस पूरे समूह में एक मजबूत न्यायिक नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। बातचीत के दौरान उन्होंने इस साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा किए गए अवैध हमलों का भी जिक्र किया और कहा कि ईरान ने इन तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी रणनीतिक ताकत को साबित किया है। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि न्यायिक मामलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों को तकनीकी रूप से भी मिलकर काम करना चाहिए।
शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन पर चर्चा
ईरान के न्याय प्रमुख ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इच्छा जताई कि उनका देश भविष्य में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के न्याय प्रमुखों के सम्मेलन की मेजबानी करना चाहता है। उन्होंने बताया कि इससे पहले यह आयोजन अमेरिका और इस्राइल की तरफ से की गई अन्यायी कार्रवाई के कारण टालना पड़ा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी कोर्ट के अध्यक्ष झांग जुन ने ईरानी न्याय प्रमुख को उनके पद पर दोबारा नियुक्ति के लिए बधाई दी। झांग जुन ने अप्रैल 2025 में चीन में हुई अपनी पिछली बैठकों को याद करते हुए कहा कि तमाम वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद चीन और ईरान के रिश्ते बेहद स्थिर और अच्छे बने हुए हैं।
चीनी पक्ष की ओर से यह भी साफ किया गया कि उनका देश न्यायिक शासन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकों में अपनी प्रगति को ईरान के साथ साझा करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही चीन ने ईरानी न्याय प्रणाली के अनुभवों से भी बहुत कुछ सीखने की इच्छा जताई है। यह पूरी बैठक इस बात को साबित करती है कि पश्चिम एशिया और एशिया के ये दोनों बड़े देश बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था में आपसी सहयोग को कितना ज्यादा महत्व दे रहे हैं, जिससे आने वाले समय में इनके कानूनी और प्रशासनिक रिश्ते और अधिक गहरे होने की पूरी उम्मीद है।