Oman Hormuz Deal: ईरान ने कहा अमेरिका के माने बिना ओमान के साथ हॉर्मुज ट्रांजिट समझौता लागू नहीं होगा

ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने 30 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हुआ ट्रांजिट समझौता पूरी तरह से अमेरिका के रुख पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि जब तक अमेरिका इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MoU के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक इस समझौते को लागू नहीं किया जाएगा। इस बयान से साफ होता है कि ईरान और ओमान के बीच बनी सहमति का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि जलडमरूमध्य को आम जहाजों के आने-जाने के लिए खोल दिया गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान के अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि यह रणनीतिक जलमार्ग अभी भी पूरी तरह से बंद है और यहां से किसी भी जहाज को गुजरने के लिए ईरान से विशेष अनुमति और तालमेल की जरूरत होगी। Kazem Gharibabadi ने यह भी कहा कि ईरान इस रास्ते को दोबारा खोलने की जल्दी में नहीं है और वह किसी भी खतरे से निपटने के लिए अपनी रक्षात्मक कार्रवाई जारी रखेगा। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका पर पिछले 16 महीनों में तीन बार कूटनीतिक कोशिशों को धोखा देने का गंभीर आरोप लगाया और कहा कि अमेरिका के नए प्रतिबंध तेहरान की तैयारियों के आगे बेअसर साबित होंगे।
ओमान के साथ हुआ है समझौता
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 29 अगस्त 2026 को यह बात कही थी कि यदि अमेरिका कुछ खास शर्तें मान लेता है, तो तेहरान इस ट्रांजिट रूट को शुरू करने के लिए तैयार है। इन शर्तों में ईरान के ईंधन और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों को हटाना, ईरान के जमे हुए फंड को जारी करना और विदेशी निवेश को दोबारा शुरू करना शामिल है। वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के प्रवक्ता Brig. Gen. Hossein Mohebbi ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान और ओमान के बीच इस जलडमरूमध्य के पानी और ट्रांजिट राजस्व के बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है।
शिपिंग और व्यापार पर असर
दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM का कहना है कि अमेरिकी सेना का इस जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले दावा किया था कि अमेरिकी नौसेना ने इस इलाके से बारूदी सुरंगों को साफ कर दिया है, लेकिन Kazem Gharibabadi ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इलाके में सामान्य शिपिंग ट्रैफिक का अभी भी न होना इस बात का सबूत है कि वहां पाबंदियां जारी हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात दिनों में इस जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की शिपिंग घटकर औसतन 3.8 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गई है, जबकि ईरान-अमेरिका समझौता लागू रहने के दौरान यह आंकड़ा 9.8 मिलियन बैरल प्रति दिन था। CENTCOM की रिपोर्ट बताती है कि नाकाबंदी की वजह से 82 मर्चेंट जहाजों, 3 खराब जहाजों और 2 बोर्ड किए गए जहाजों को दूसरे रास्ते पर मोड़ना पड़ा है, जिससे ईरान के विदेशी व्यापार में लगभग 35 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।