Oman और Iran के बीच हुआ समझौता, Hormuz Strait में अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर बनाने पर बनी सहमती.

खाड़ी देशों के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है जहाँ Iran और Oman ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर बनाने पर सहमति जताई है। इस बात की आधिकारिक घोषणा 28 अगस्त 2026 को की गई थी, जिसके बाद समुद्री व्यापार से जुड़े लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने इस डील की पुष्टि की और बताया कि इस कॉरिडोर को पूरी तरह से लागू करने के लिए कुछ खास शर्तें रखी गई हैं। इन शर्तों में क्षेत्रीय युद्ध का अंत होना, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करना और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यदि अमेरिका इन शर्तों को मान लेता है, तो जहाजों की आवाजाही के लिए एक केंद्रीय मार्ग खोल दिया जाएगा।
अस्थायी रूट को लेकर शुरू हुई थी बातचीत
इस अस्थायी कॉरिडोर को लेकर चर्चाओं की शुरुआत 25 अगस्त 2026 को ही एक चरणबद्ध रूपरेखा के तहत शुरू हो गई थी। इस योजना के तहत दोनों देशों ने मिलकर खदान हटाने यानी माइन-क्लीयरिंग प्रोजेक्ट पर भी काम किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने यह साफ किया कि इस अस्थायी रास्ते का इस्तेमाल कोई भी सैन्य जहाज नहीं कर पाएगा। इस मार्ग को केवल 30 से 60 दिनों की अवधि के लिए संचालित करने की योजना बनाई गई है, ताकि इस दौरान स्थायी व्यवस्थाओं पर बातचीत की जा सके। प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार इस मार्ग में दो तरफ़ा शिपिंग लेन बनाई गई हैं जिन्हें लगभग दो नॉटिकल मील की दूरी से अलग किया गया है और इसकी कुल चौड़ाई करीब सात नॉटिकल मील है। इस योजना के तहत देश में आने वाले कमर्शियल जहाज ईरानी पानी से गुजरेंगे, जबकि बाहर जाने वाले जहाज ईरान और ओमान दोनों के पानी का इस्तेमाल करेंगे।
राजनयिक कोशिशें और क्षेत्रीय तनाव
क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास बहुत तेजी से चल रहे हैं। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने 27 अगस्त 2026 को तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और विदेश मंत्री Abbas Araghchi से मुलाकात करके इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी। इस मध्यस्थता में पाकिस्तान और ओमान भी अहम भूमिका निभा रहे हैं और ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad Al Busaidi ने भी तेहरान का दौरा करके उच्च स्तर की बातचीत की है। इन सभी वार्ताओं के बावजूद, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 27 अगस्त 2026 को ही यह डील होने की घोषणा कर दी थी, हालांकि ईरान का यह भी कहना है कि अगर उसकी शर्तें पूरी नहीं होती हैं तो जलमार्ग बंद ही रहेगा। ईरान ने अमेरिका के उन दावों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि खदान हटाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
जहाजों की आवाजाही और अमेरिका का रुख
क्षेत्र की स्थिति अभी भी काफी संवेदनशील बनी हुई है जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 26 या 27 अगस्त 2026 को एक और कमर्शियल टैंकर पर किसी अज्ञात चीज से हमला किया गया था। हालांकि 27 अगस्त को जहाजों की आवाजाही में थोड़ी बढ़त देखी गई और उस दिन कुल 10 जहाज गुजरे, जो कि पिछले दिन के आठ जहाजों से तो ज्यादा थे, लेकिन 10 दिनों के औसत 15 जहाजों और युद्ध से पहले के स्तर से अभी भी बहुत कम हैं। अमेरिका लगातार अपनी नौसेना की ताकत को बनाए हुए है और उसने एक नया कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी तैनात किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ सीधी बातचीत नहीं कर रहा है और इसके बजाय आर्थिक दबाव को लगातार बढ़ा रहा है। Gulf देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए इस समुद्री मार्ग का सुरक्षित होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे व्यापार और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ता है।