मध्य पूर्व सुरक्षा पर चीन के प्रस्ताव का ईरान के संसद अध्यक्ष ने किया समर्थन, बाहरी दखल पर जताई आपत्ति.

मध्य पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर कूटनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। 4 सितंबर 2026 को ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने आधिकारिक तौर पर चीन के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें मध्य पूर्व के लिए एक नई क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला बनाने की बात कही गई है। गालिबाफ, जो चीन मामलों के लिए ईरान के विशेष दूत भी हैं, ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में असली स्थिरता केवल एक घरेलू ढांचे के जरिए ही हासिल की जा सकती है। उन्होंने बाहरी दखल से पूरी तरह से आजादी की बात दोहराई है, ताकि देश अपने फैसले खुद ले सकें।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बयान
यह बड़ा समर्थन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान के बाद सामने आया है, जो उन्होंने मिस्र की यात्रा के दौरान 3 सितंबर 2026 को दिया था। चीनी राष्ट्रपति ने मध्य पूर्व के देशों से अपील की थी कि वे अपने भविष्य के खुद मालिक बनें और विदेशी प्रभावों से दूर रहें। इसके अलावा, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्रीय शिपिंग रूट्स की सुरक्षा में हर संभव मदद करने की भी बात कही थी, ताकि व्यापारिक जहाजों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
भारत में न्यायिक सहयोग पर चर्चा
कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की इस कड़ी में 4 सितंबर 2026 को ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ने नई दिल्ली, भारत में आयोजित ब्रिक्स न्यायिक नेताओं की बैठक के दौरान चीन के सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट के अध्यक्ष झांग जून से मुलाकात की। इस अहम बैठक के दौरान दोनों अधिकारियों ने कानूनी और न्यायिक सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। चीनी अधिकारी झांग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीकों और न्यायिक शासन से जुड़े मामलों में आपसी साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा जताई है।
क्षेत्रीय भू-राजनीति और अमेरिका-ईरान तनाव
यह तमाम घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आ रहे हैं जब वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इससे पहले 1 सितंबर 2026 को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक संक्षिप्त मुलाकात भी हुई थी। हालांकि ईरान के कुछ राजनेताओं ने मौजूदा साझेदारी की गहराई पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई समर्पित द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हुआ है। जानकारों का मानना है कि चीन मौजूदा अमेरिका-ईरान संघर्ष में तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा है।
इसके बावजूद विश्लेषकों का यह भी कहना है कि चीन अपने वैश्विक आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ सीधे टकराव में पड़ने से अभी भी बच रहा है। 4 सितंबर 2026 तक क्षेत्रीय तनाव लगातार उच्च स्तर पर बने हुए हैं। ईरान अमेरिका के नेतृत्व वाली पहलों को लगातार चुनौती दे रहा है, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजना और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते व्यापार की स्थिरता को लेकर बनी चिंताएं शामिल हैं। इन तमाम मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पैनी नजर बनी हुई है कि आने वाले समय में कूटनीति क्या नया मोड़ लेती है।