अमेरिका के दबाव के आगे नहीं झुकेगा ईरान, ब्रिक्स समिट में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने किया बड़ा ऐलान.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस समय हलचल काफी तेज चल रही है और खाड़ी देशों से लेकर बड़े सम्मेलनों तक हर तरफ तनाव का माहौल दिखाई दे रहा है। 12 सितंबर 2026 को भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दुनिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका देश अमेरिका के किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगा। इस सम्मेलन में उन्होंने अमेरिका और इसराइल पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि ये देश लगातार सैन्य आक्रामकता दिखा रहे हैं और आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को निशाना बना रहे हैं।
आर्थिक तंगी और प्रतिबंधों पर ईरान का कड़ा रुख
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में बताया कि मौजूदा समय में ईरान की आर्थिक स्थिति बहुत ही संवेदनशील और खतरनाक दौर से गुजर रही है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि अमेरिकी वित्त सचिव Scott Bessent ने अगस्त 2026 में ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने यानी 'economic asphyxiation' की नीति की बात कही थी। ब्रिक्स मंच पर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की। सम्मेलन में शामिल अन्य वैश्विक नेताओं ने भी इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक झटकों से बचने के लिए देशों को आपसी व्यापार में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का ही इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा शांतिपूर्ण परमाणु संयंत्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को लेकर भी चिंता जताई गई।
समुद्री तनाव और हॉर्मूज जलडममध्य की स्थिति
समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर चल रहे तनाव पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को तब तक बंद रखा जाएगा जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी पूरी तरह से खत्म नहीं कर देता। खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान और कतर की मध्यदस्थता से जून 2026 में एक अंतरिम समझौता यानी 'Islamabad Memorandum of Understanding' हुआ था, जो बाद में टूट गया। हालांकि 11 सितंबर 2026 को ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा था कि वह इस संघर्ष को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय मजबूती के लिए उनका रुख साफ है। सऊदी अरब में ईस्ट-पश्चिम ऑयल पाइपलाइन पर हुए हमलों और इराक में बॉर्डर सील होने की घटनाओं ने इस पूरे मामले को और ज्यादा जटिल बना दिया है, जिससे आम लोगों और प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल है।