ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन का बड़ा बयान, देश में आर्थिक युद्ध जैसे हालात और नए अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

Praggya Singh sabal26 August 20263 min read51 viewsWorld
ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन का बड़ा बयान, देश में आर्थिक युद्ध जैसे हालात और नए अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 26 अगस्त 2026 को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनका देश इस समय इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक युद्ध के दौर से गुजर रहा है। राजधानी तेहरान स्थित सेंट्रल बैंक में हुई एक अहम बैठक के दौरान उन्होंने देश के सामने आ रही गंभीर आर्थिक चुनौतियों पर खुलकर बात की। इस बैठक में अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madanizadeh, सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati और कई जाने-माने अर्थशास्त्री शामिल हुए थे। राष्ट्रपति ने साफ कहा कि भले ही दुनिया भर का ध्यान सैन्य गतिविधियों पर टिका हो, लेकिन ईरान के भीतर आर्थिक संघर्ष उससे कहीं ज्यादा खतरनाक और गहरा होता जा रहा है। उन्होंने बातचीत के जरिए मामलों को सुलझाने की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही यह भी चेताया कि ईरान अमेरिका के किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और वाशिंगटन को अपनी इन चालों से कुछ हासिल नहीं होगा।

अमेरिका का कड़ा रुख और ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट

ईरान के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ Operation Economic Outcast नाम से अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रतिबंध अभियान शुरू किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने जानकारी दी है कि इस अभियान का मुख्य मकसद ईरानी शासन की हर आर्थिक lifeline को पूरी तरह से काटना है। वहीं स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता Tommy Pigott ने भी पुष्टि की है कि अमेरिका ईरान के बचे हुए सभी वित्तीय रास्तों को बंद कर रहा है। अमेरिकी कदमों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी अधिकारियों ने इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है। अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madanizadeh ने बताया कि ईरान पिछले दो सालों से ऐसे हालात से निपटने की पूरी तैयारी कर रहा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इस अमेरिकी अभियान को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है और संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की यह दबाव बनाने की रणनीति उल्टे उन्हीं पर भारी पड़ेगी।

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घरेलू मोर्चे पर बढ़ती मुश्किलें और तेल से जीरो कमाई

ईरान के भीतर आम जनता और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव साफ देखा जा सकता है। सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने खुद इस बात को माना है कि तेल बेचने से होने वाली कमाई अब घटकर शून्य यानी जीरो पर पहुंच गई है। देश की मुद्रा की कीमत रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है। इसके अलावा भीषण गर्मी और बिजली की भारी कमी के कारण खुजेस्तान प्रांत के दो बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांटों में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। हालात इतने गंभीर होते जा रहे हैं कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक कोशिशें

इस पूरे मामले पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आ रही हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अमेरिका की इस नई नीति का खुलकर समर्थन किया है। दूसरी तरफ, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने इस तरह के आर्थिक युद्ध के तरीकों की कड़ी आलोचना की है। इन सबके बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi क्षेत्रीय मोर्चे पर लगातार सक्रिय हैं और उन्होंने पाकिस्तान तथा ओमान के अधिकारियों के साथ बातचीत की है। इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होरमुज में शिपिंग लेन और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा ईरान रूस की कंपनी Gazprom के साथ गैस के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और ज्यादा बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

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