तेहरान सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति ने की मुस्लिम देशों से आर्थिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की अपील.

तेहरान में आयोजित 40th International Islamic Unity Conference के दौरान ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने सभी मुस्लिम देशों से आपसी आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का आग्रह किया। यह महत्वपूर्ण बैठक 27 August 2026 को हुई थी, जिसमें उन्होंने खाड़ी और दुनिया भर के इस्लामिक देशों के बीच आपसी तालमेल की कमी पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में 57 OIC member countries हैं जो दक्षिण पूर्व एशिया से लेकर अफ्रीका तक फैले हुए हैं और बेहद जरूरी व्यापारिक मार्गों पर अपनी पकड़ रखते हैं। इसके बावजूद इन सभी देशों की कुल आर्थिक ताकत इनकी आबादी और संसाधनों के मुकाबले काफी कम है, जिस पर अब ध्यान देने की जरूरत है।
मुस्लिम देशों की आर्थिक स्थिति और व्यापार पर चर्चा
राष्ट्रपति पेशमेशकियन द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में OIC सदस्य देशों की कुल अर्थव्यवस्था लगभग $9.2 trillion थी, जो कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का केवल 8.3% हिस्सा बनती है। उन्होंने यह भी बताया कि इन सदस्य देशों से होने वाले कुल निर्यात का केवल 19% हिस्सा ही आपस में व्यापार के रूप में होता है, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा गैर-ओआईसी देशों को जाता है। उन्होंने इन सभी देशों से अपील की कि वे अपने युवाओं की बड़ी संख्या और ऊर्जा संसाधनों का सही इस्तेमाल करके आपसी व्यापार को बढ़ाएं ताकि हर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।
सुरक्षा और सहयोग के लिए तीन मुख्य प्रस्ताव
इस सम्मेलन में आपसी दूरियों को मिटाने और देशों को करीब लाने के लिए राष्ट्रपति ने तीन अहम प्रस्ताव सामने रखे। सबसे पहले उन्होंने एक आपसी सुरक्षा और गैर-आक्रामकता समझौते की मांग की, जिससे हर देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो सके, किसी भी देश की जमीन का इस्तेमाल दूसरे देश के खिलाफ न हो और अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों को रोका जा सके। दूसरे प्रस्ताव के तहत उन्होंने OIC के माध्यम से विवादों को सुलझाने और उन्हें रोकने के लिए एक स्थायी तंत्र बनाने की बात कही। तीसरे और अंतिम प्रस्ताव में उन्होंने वैज्ञानिक और आर्थिक साझेदारी को गहरा करने पर जोर दिया, जिसमें मुस्लिम देशों के बीच साझा शोध प्रोजेक्ट और पूंजी का लेन-देन शामिल है।
ईरान की क्षेत्रीय सुरक्षा नीति और पड़ोसी देशों से संबंध
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सुरक्षा नीति किसी कमजोरी का नतीजा नहीं बल्कि उनके पुराने अनुभवों पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है कि कोई भी मुस्लिम देश अपने पड़ोसियों की कीमत पर अपनी सुरक्षा हासिल करने की कोशिश न करे। अपने भाषण के अंत में उन्होंने तमाम मतभेदों को भुलाकर आपसी एकता बनाए रखने की बात दोहराई और कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाने और इस्लामिक दुनिया के भीतर सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।