Iran News: ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसियों के लिए रखा नया सुरक्षा प्रस्ताव, कहा जंग किसी का भला नहीं करती।

ইরান के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पड़ोसी देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करने की बड़ी बात कही है। उन्होंने साफ किया कि उनका देश खाड़ी और आसपास के इलाकों में शांति चाहता है और इसके लिए एक संयुक्त सुरक्षा समझौता होना चाहिए। यह बात उन्होंने तेहरान में आयोजित एक बड़े सम्मेलन के दौरान कही। राष्ट्रपति के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है और किसी भी तरह के तनाव से बचना चाहता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग का प्रस्ताव
बुधवार 27 अगस्त 2026 को तेहरान में 40वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इस्लामिक यूनिटी का आयोजन किया गया था। इसी कार्यक्रम में बोलते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने मुस्लिम देशों से अपील की कि वे आपसी सुरक्षा और गैर-आक्रामकता की एक संधि पर हस्ताक्षर करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी देशों को एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान करना चाहिए। साथ ही यह भी वादा करना होगा कि कोई भी देश अपनी जमीन, एयरस्पेस या सुविधाओं का इस्तेमाल किसी दूसरे मुस्लिम देश पर हमला करने के लिए नहीं होने देगा।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि देशों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि किसी भी तरह की अस्थिरता या अलगाववाद को बढ़ावा न मिले। सुरक्षा के अलावा उन्होंने आर्थिक मामलों में भी मिलकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने बुनियादी ढांचे, व्यापार, निवेश और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य समूह बनाने की बात कही ताकि पूरे क्षेत्र का विकास हो सके।
युद्ध का दर्द और पुराना अनुभव
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने पुराने युद्ध के अनुभवों को याद करते हुए बहुत ही भावुक बात कही। उन्होंने साफ किया कि पड़ोसी देशों की तरफ यह दोस्ती का हाथ किसी कमजोरी की वजह से नहीं बढ़ाया जा रहा है, बल्कि इसके पीछे युद्ध की विनाशकारी सच्चाई है। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि हम अच्छी तरह जानते हैं कि जंग क्या होती है और जब मिसाइलें तथा बम गिरते हैं, तो वे एक ईरानी मां और एक अरब मां के सपनों में कोई फर्क नहीं करते हैं। यानी बम किसी की पहचान देखकर नहीं गिरता, बल्कि तबाही दोनों तरफ लाता है।
इस पूरे मामले की जानकारी कुवैत की प्रमुख समाचार एजेंसी KUNA द्वारा 28 अगस्त 2026 को साझा की गई थी। इस रिपोर्ट के आने के बाद से ही मध्य पूर्व के कूटनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में खाड़ी देशों के बीच आपसी मतभेद कम होंगे और सुरक्षा के मोर्चे पर एक नया दौर शुरू होगा। इस पहल को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।