Iran ने पेट्रोल के दामों में किया बड़ा इजाफा, भारी इस्तेमाल करने वालों को देना होगा महंगा रेट।

ईरान सरकार ने देश के अंदर आर्थिक तंगी और ईंधन की भारी कमी से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 8 सितंबर 2026 से उन लोगों के लिए पेट्रोल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है जो इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। दिसंबर 2025 के बाद से यह इस तरह का दूसरा बड़ा बदलाव है, जिसे देश में ईंधन की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए लागू किया गया है।
नया राशनिंग सिस्टम और बढ़ी हुई कीमतें
सरकार की तरफ से इस नई नीति के तहत तीन चरणों वाला राशनिंग सिस्टम जारी रखा गया है। पहले चरण के तहत हर महीने 60 लीटर पेट्रोल 1,500 टोमान (15,000 रियाल) प्रति लीटर के हिसाब से मिलता है। वहीं, दूसरे चरण में अतिरिक्त 50 लीटर पेट्रोल 3,000 टोमान (30,000 रियाल) प्रति लीटर मिलता है। लेकिन जो लोग 110 लीटर के मासिक कोटे से ज्यादा पेट्रोल खर्च करते हैं, उन्हें अब प्रति लीटर 10,000 टोमान (100,000 रियाल) चुकाने होंगे। यह नया रेट पुराने रेट से सीधे दोगुना है। नेशनल ईरानी ऑयल प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (NIOPDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Keramat Veis Karami ने बताया कि इस बदलाव से करीब 15 प्रतिशत उपभोक्ता प्रभावित होंगे और इससे रोजाना की पेट्रोल खपत में कम से कम 30 लाख लीटर की कमी आ सकती है। इसके अलावा, नेशनल ईरानी ऑयल रिफाइनिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रमुख Mohammad-Sadegh Azimifar भी इस वितरण बदलाव की देखरेख कर रहे हैं।
ईंधन संकट और महंगाई का दबाव
ईरान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जहां सालाना महंगाई दर करीब 67 प्रतिशत है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थानीय मुद्रा की कीमत गिरकर 22.2 लाख रियाल प्रति डॉलर पहुंच गई है। अगस्त के महीने में देश में पेट्रोल की रोजाना खपत रिकॉर्ड 14.5 करोड़ लीटर तक पहुंच गई थी, जो घरेलू उत्पादन क्षमता 12.2 करोड़ लीटर से काफी ज्यादा है। सरकारी अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि इस बढ़ी हुई कीमत से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल आम परिवारों की आजीविका को सहारा देने के लिए किया जाएगा।
संवेदनशील मुद्दा और जनता की प्रतिक्रिया
ईरान में पेट्रोल की कीमतें बढ़ाना एक बेहद संवेदनशील मामला रहा है। साल 2019 में जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए थे, तब देश भर में हिंसक और घातक प्रदर्शन हुए थे। हाल ही में संसद सदस्य Hossein Samsami ने भी चेतावनी दी थी कि इस तरह के कदम बारूद के ढेर में चिंगारी लगाने जैसा काम कर सकते हैं। यह नया फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के कई शहरों जैसे कि करमानशाह में 7 सितंबर 2026 को वेतन और पेंशन को लेकर पहले से ही मजदूरों के प्रदर्शन चल रहे हैं।