ईरान ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के परमाणु कार्यक्रम वाले कदम को बताया पूरी तरह बेकार और निराशाजनक.

Nura Basta4 September 20263 min read20 viewsWorld
ईरान ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के परमाणु कार्यक्रम वाले कदम को बताया पूरी तरह बेकार और निराशाजनक.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर से तनाव का माहौल बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जब 4 सितंबर 2026 को ईरान ने अमेरिका और ई3 देशों यानी ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के संयुक्त कदम को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने इस कदम को पूरी तरह से निराशाजनक और उनकी पुरानी नीतियों की हार बताया है। वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ईरान के मिशन ने साफ शब्दों में कहा कि उनका देश परमाणु अप्रसार संधि यानी NPT के नियमों का पूरी तरह से पालन कर रहा है और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक विकसित करने के अपने अधिकार पर कायम है। ईरान का यह भी कहना है कि उनका इरादा कभी भी परमाणु हथियार बनाने का नहीं रहा है, फिर भी पश्चिमी देश लगातार उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मामला ले जाने की तैयारी

अमेरिका और ई3 देश मिलकर इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी यानी IAEA के बोर्ड पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि ईरान के परमाणु मामले को पिछले 20 वर्षों में पहली बार सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा जाए। इन देशों का तर्क है कि ईरान ने बिना घोषित किए गए ठिकानों पर मिले यूरेनियम के निशानों की जांच में सहयोग नहीं किया है, जो उनके नियमों का उल्लंघन है। एजेंसी ने इस बात पर भी अपनी गहरी चिंता जताई है कि ईरान ने यूरेनियम को 60 प्रतिशत की शुद्धता तक समृद्ध किया है। इस समय ईरान के इस्फहान और नतांज के ठिकानों पर 200 किलोग्राम से ज्यादा ऐसा मटीरियल मौजूद है, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

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निरीक्षकों की पहुंच और पुरानी घटनाएं

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि जून 2025 के बाद से उनके निरीक्षकों को बमबारी वाले ठिकानों पर जाने की अनुमति नहीं मिली है, जिसकी वजह से उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पूरी जानकारी मिलना बंद हो गई है। इसके अलावा, पिछले एक साल से अधिक समय से उन्हें स्टॉकपाइल यानी परमाणु सामग्री के भंडार का कोई भी नया डेटा नहीं मिला है। इस मामले में अमेरिका की आधिकारिक वेबसाइट USUN Mission पर भी विस्तार से जानकारी दी गई है कि कैसे पश्चिमी देश ईरान की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। यह पूरा विवाद 12 जून 2025 के उस प्रस्ताव के बाद शुरू हुआ था जिसमें ईरान को उसके दायित्वों को पूरा न करने का दोषी करार दिया गया था। इसके बाद अगस्त 2025 में ई3 देशों ने यूएन प्रस्ताव 2231 के तहत स्नैपबैक मैकेनिज्म को एक्टिवेट कर दिया था।

रूस और चीन का रुख और आगामी बैठक

इस पूरे मामले में रूस और चीन खुलकर ईरान के समर्थन में हैं और वे प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के किसी भी फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद, फ्रांस जिसके पास इस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता है, वह लगभग 17 सितंबर 2026 के आसपास प्रतिबंध समिति के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण वोटिंग की देखरेख करने वाला है। पिछले डेढ़ साल का समय भू-राजनीतिक रूप से काफी उथल-पुथल भरा रहा है, जिसमें 13 जून 2025 को परमाणु ठिकानों पर हुए सैन्य हमले, 28 फरवरी 2026 को तेहरान के खिलाफ हुआ हवाई युद्ध और 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए हुआ समझौता टूट जाना शामिल है। कतर की समाचार एजेंसी QNA News के अनुसार, ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई ने 4 सितंबर 2026 को यह साफ कर दिया कि उनका देश पिछले डेढ़ साल में हुए दोनों युद्धों में दुश्मनों पर भारी पड़ा है और वह कभी भी अमेरिका के सामने घुटने नहीं टेकेगा।

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