Saudi Arabia पर मंडराया खतरा, ईरान ने पकड़ा जहाज तो अमेरिका ने दिए F-35 फाइटर जेट.

खाड़ी देशों में इन दिनों तनाव काफी बढ़ गया है और हालात लगातार बदलते जा रहे हैं। 18 September 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य में टोगो के झंडे वाले तेल टैंकर ट्रेंड को अवैध पैसेज का हवाला देते हुए रोक लिया। इस घटना से ठीक पहले यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने ओमान के खासब से उत्तर पूर्व में एक जहाज को लेकर सुरक्षा रिपोर्ट जारी की थी। इस तरह की घटनाएं इस साल 28 February 2026 से लगातार सामने आ रही हैं, जब ईरान ने 77 जहाजों की ब्लैकलिस्ट बनाई और इस रूट पर कमर्शियल ट्रैफिक को सीमित कर दिया। इन बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण इस हफ्ते ओमान में होने वाली ईरान और खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी की मीटिंग को टाल दिया गया। सऊदी अरब के अनुरोध के बाद यह बैठक स्थगित हुई और बहरीन ने भी इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया।
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच बड़ा रक्षा सौदा
एक तरफ जहां समंदर में तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ एक बड़े रक्षा समझौते की तैयारी कर ली है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कांग्रेस को $24.3 billion यानी करीब 24.3 अरब डॉलर के संभावित हथियार सौदे की जानकारी दी है। इस संभावित डील के तहत सऊदी अरब को 48 एफ-35ए लाइटनिंग टू फाइटर जेट और 49 एफ135 इंजन दिए जाएंगे। अमेरिका का कहना है कि इस डील से इस इलाके के सैन्य संतुलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब हूती विद्रोहियों ने मोखा पर कब्जा कर लिया है और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के द्वीपों की तरफ बढ़ रहे हैं। हूती गुट ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत और यान्बू जैसे ठिकानों पर हमलों का दावा किया है। सऊदी प्रशासन ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को हवा में ही गिराने की पुष्टि की है, जबकि हूती प्रवक्ताओं का दावा है कि उनके खिलाफ एक ही दिन में 40 सॉर्टे यानी उड़ानें भरी गईं। इसके अलावा हाल ही में हुए एक ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने इराक आधारित मिलिशिया पर शक जताया और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे ईरान का हाथ बताया, जिसके कारण ईस्ट-पश्चिम पाइपलाइन को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था।
चीन की दखलअंदाजी और कच्चे तेल की कीमतें
इन तमाम गंभीर हालात को देखते हुए चीन ने भी कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें शुरू कर दी हैं। चीन ने ईरान से निजी तौर पर यह आग्रह किया है कि वह हूती विद्रोहियों को रोकें ताकि ऊर्जा सप्लाई के वे रास्ते सुरक्षित रह सकें जो चीनी उद्योगों के लिए बहुत जरूरी हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान का यह कहना है कि इस क्षेत्र में शांति तभी कायम हो सकती है जब अमेरिका और इस्राइल का संघर्ष पूरी तरह से बंद हो जाए। इन सब भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 से $110 प्रति बैरल के बीच ऊपर-नीचे हो रही हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा की आगामी बैठक के दौरान अमेरिका और जीसीसी देशों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत होने की उम्मीद है, क्योंकि होर्मुज और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में समुद्री तनाव अभी भी बना हुआ है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के लिए इन हालात पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि इससे आने वाले दिनों में यात्रा और ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।