ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर का बड़ा बयान, मुस्लिम देश बाहरी ताकतों के बिना खुद बनाएं अपनी सुरक्षा नीति.

शनिवार, 29 अगस्त 2026 को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि क्षेत्रीय संधियां और व्यवस्थाएं सुरक्षा के एक नए चरण की शुरुआत कर सकती हैं। इस नए दौर में मुस्लिम देशों को बाहरी ताकतों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की सामूहिक क्षमताओं पर भरोसा करना चाहिए। गालिबफ ने यह बात 'यूनिटी वीक' यानी एकता सप्ताह के मौके पर जारी एक आधिकारिक संदेश में कही। उनके इस बयान से क्षेत्रीय राजनीति में एक नई चर्चा शुरू हो गई है, जिसमें आपसी सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
बाहरी ताकतों की भूमिका पर सवाल
अपने संबोधन में गालिबफ ने साफ तौर पर कहा कि बाहरी ताकतें न तो मुस्लिम देशों को स्थायी सुरक्षा देने के काबिल हैं और न ही उनकी ऐसी कोई इच्छा है। उन्होंने तर्क दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि मुस्लिम पड़ोसी देश खुद आगे आएं और आपसी सहयोग तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई क्षेत्रीय व्यवस्थाएं एक ऐसा दौर ला सकती हैं जहां मुस्लिम देश विदेशियों का मुंह देखने के बजाय अपनी खुद की ताकतों पर भरोसा करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि देशों को आपस में थका देने वाली प्रतिद्वंद्विता यानी फालतू की आपसी दुश्मनी को छोड़कर केवल सहयोग का रास्ता चुनना चाहिए।
सुन्नी और शिया एकता पर जोर
तासिम न्यूज एजेंसी और मेहर न्यूज एजेंसी जैसे ईरानी सरकारी मीडिया आउटलेट्स द्वारा रिपोर्ट किए गए इस बयान में गालिबफ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सुन्नी और शिया मुसलमानों के बीच की एकता ही राष्ट्रीय ताकत की असली नींव है। उन्होंने बताया कि दूसरे क्षेत्रों के दखल से मिलने वाली सुरक्षा बहुत कमजोर होती है, जबकि इस्लामिक एकता ने इतिहास में कई बार आक्रमणकारियों के खिलाफ सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी है। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में पूरा मुस्लिम देश एक ऐसी व्यवस्था की तरफ बढ़ेगा जहां उनकी सुरक्षा, सम्मान और भविष्य के फैसले बाहरी लोगों के हाथ में न होकर खुद मुसलमानों के हाथों में होंगे।