Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर ईरान ने रखी बड़ी शर्त, अमेरिका से मांगा MoU का पालन

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए ईरान ने अपनी शर्तें रख दी हैं। 28 अगस्त 2026 को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने यह साफ कर दिया है कि ईरान इस अहम समुद्री रास्ते को तभी खोलेगा जब अमेरिका पहले किए गए समझौते यानी एमओयू की सभी शर्तों को पूरी तरह से मानेगा। इस बड़े बयान के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है और इसका असर सीधे तौर पर वहां रहने वाले लोगों और कमर्शियल शिपिंग पर पड़ रहा है।
पुराने समझौते और नई शर्तें
इससे पहले 27 अगस्त 2026 को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने भी इस बात की जानकारी दी थी कि ईरान इस रास्ते को खोलने के लिए कुछ नियम और शर्तें तैयार कर रहा है। इन शर्तों में क्षेत्रीय दुश्मनी को खत्म करना, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी पाबंदियों को हटाना, युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करना और सभी तरह के प्रतिबंधों को वापस लेना मुख्य रूप से शामिल है। आपको बता दें कि यह पूरा विवाद उस समझौते से जुड़ा है जो 17 जून 2026 को हुआ था, जिसका मकसद 60 दिनों के भीतर शांति स्थापित करना और इस रास्ते को खोलना था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 8 जुलाई को इस समझौते को खत्म घोषित कर दिया था और यह आधिकारिक तौर पर 17 अगस्त को समाप्त हो गया, लेकिन इसके बावजूद ईरानी अधिकारी लगातार इसके नियमों का हवाला दे रहे हैं।
अमेरिका का कड़ा रुख और कूटनीतिक प्रयास
दूसरी तरफ अमेरिका ने इस मामले में पूरी तरह से सख्त रवैया अपनाया हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 27 अगस्त को यह बयान दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय पूरी तरह से खुला हुआ है और अमेरिकी सेना ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स से सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को सफलतापूर्वक हटा दिया है। व्हाइट हाउस की उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ इस समय किसी भी तरह की कोई बातचीत न तो चल रही है और न ही कोई बैठक तय की गई है। इसके अलावा 28 अगस्त को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की शुरुआत की, जिसके तहत अमेरिका के वित्तीय नेटवर्क से Banque Misr UAE की कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग पहुंच को रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन सभी अमेरिकी कदमों को 'स्टेट आतंकवाद' कहकर सिरे से खारिज कर दिया है।
व्यापार और परिवहन पर असर
इस पूरे तनाव के बीच क्षेत्रीय मध्यस्थ लगातार हालात को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने 27 अगस्त को तेहरान का दौरा किया और वहां के अधिकारियों से कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू करने तथा नेविगेशन की स्वतंत्रता को बहाल करने की अपील की। अमेरिकी दावों के उलट जमीनी हकीकत यह है कि व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। 28 अगस्त के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक केवल सात कमोडिटी वेसल ही इस जलडमरूमध्य से गुजर पाए, जो पिछले 10 दिनों के औसत से काफी कम है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने भी 28 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए कहा कि अगर अमेरिका आर्थिक दबाव डालना बंद कर दे और ईरान के अधिकारों का सम्मान करे, तो बातचीत का रास्ता अब भी मुमकिन है।