Iran News: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का सख्त फरमान, देश में सामाजिक एकता को तोड़ने वाले हर काम पर लगी रोक.

ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने आज एक नया लिखित बयान जारी किया है जिसमें देश के अंदर सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। यह आदेश ऐसे समय पर आया है जब देश के भीतर कई तरह के तनाव चल रहे हैं और सरकार के सामने आंतरिक और बाहरी मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। इस फरमान के जरिए अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे ऐसे किसी भी बयान से दूर रहें जिससे देश के लोगों का हौसला टूटे और जनता के बीच नकारात्मकता फैले। मोजतबा खामेनेई ने अपने इस संदेश में मौजूदा प्रशासन की तारीफ की और पुरानी राजनीतिक सोच को खारिज कर दिया है।
सुरक्षा एजेंसियों और संसद की चिंताएं
यह नया आदेश इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC की इंटेलिजेंस विंग की तरफ से जारी की गई चेतावनी के ठीक बाद आया है। सुरक्षा एजेंसियों ने देश के भीतर बढ़ रही नाराजगी और सड़कों पर फिर से प्रदर्शन शुरू होने की आशंका जताई थी। उनका कहना है कि बाहरी ताकतें देश की खराब आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर अंदरूनी तौर पर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं। अमेरिका और इसराइल के साथ चल रहे तनाव और देश की गंभीर आर्थिक बदहाली ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है। संसद के स्पीकर Mohammad-Bagher Ghalibaf ने भी हाल ही में कहा था कि देश की आर्थिक समस्याएं और महंगाई आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रही हैं और इससे देश की गरिमा पर असर पड़ रहा है।
सरकार की प्राथमिकता और कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात
सरकारी अधिकारी लगातार देश में एकता बनाए रखने को सबसे बड़ी प्राथमिकता बता रहे हैं। सरकार की इंफॉर्मेशन काउंसिल के प्रमुख Elias Hazrati ने राष्ट्रीय एकता को मीडिया के लिए एक बड़ी लक्ष्मण रेखा बताया है। इसके अलावा राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी हाल ही में सुप्रीम लीडर से मुलाकात के बाद बताया कि देश में आपसी मेलजोल और एकता का होना बहुत जरूरी है। एक तरफ जहां देश आर्थिक घेराबंदी का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने आज कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान अमेरिका की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का कड़ा जवाब देगा क्योंकि तेहरान को वाशिंगटन की नीयत पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।