Iran UN Complaint: अमेरिका के मिलिट्री हमले पर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में की शिकायत, तीन लोगों की हुई थी मौत.

फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने बहुत बड़ा कदम उठाया है। ईरान के राजदूत और संयुक्त राष्ट्र में चार्ज डी अफेयर्स غلامحسین درزی (Gholamhossein Darzi) ने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में ईरान ने लarak द्वीप पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। यह घटना 30 अगस्त 2026 की शाम की है, जब अमेरिकी सेना ने लarak द्वीप पर एक घातक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था। इस हमले में तीन बेकसूर लोगों की जान चली गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा, आम जनता और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
यूएन चार्टर के उल्लंघन का लगाया आरोप
ईरानी राजदूत ने अपने पत्र में साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत इसे नियम के खिलाफ बताया। इसके साथ ही, ईरान ने यह भी साफ किया कि देश के सशस्त्र बलों ने यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को राज्य प्रायोजित आतंकवाद, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है। मंत्रालय का आरोप है कि अमेरिका और इसराइल दोनों मिलकर फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लगातार अस्थिर करने का काम कर रहे हैं, जिससे वहां रहने वाले आम लोगों और काम करने वाले प्रवासियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है.
अमेरिका और सेंटकॉम का पक्ष
दूसरी तरफ, अमेरिका ने इस पूरी कार्रवाई का बचाव किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन Tim Hawkins ने जानकारी दी कि अमेरिकी बलों ने लarak द्वीप पर दो ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाकर यह हमला किया था। सेंटकॉम का यह भी आरोप था कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के जवान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस रॉकेट तैनात करने की तैयारी कर रहे थे। यह विवाद तब और बढ़ गया जब CENTCOM कमांडर एडमिरल Brad Cooper ने पहले दावा किया था कि अमेरिकी बलों ने इलाके के सभी शिपिंग लेन से समुद्री बारूदी सुरंगों को पूरी तरह साफ कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि उनका यह हमला बेहद सीमित था और खतरे को टालने के लिए जरूरी था.
खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव और भारत व प्रवासियों पर असर
लarak द्वीप की इस घटना के तुरंत बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बहुत तेजी से फैल गया है। 31 अगस्त 2026 के शुरुआती घंटों में IRGC ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर अपनी तरफ से जवाबी हमला किया, जिसे उन्होंने रक्षात्मक और आनुपातिक कार्रवाई बताया। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात की तरफ भी एक ड्रोन छोड़ा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस पूरे मामले पर बोलते हुए अमेरिकी हमले को बहुत सीमित बताया, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि ईरान की किसी भी आक्रामकता का कड़ा जवाब दिया जाएगा। 1 सितंबर 2026 तक हालात तब और गंभीर हो गए जब यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने रिपोर्ट दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर को तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया है। इन लगातार हमलों और बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों, विशेष रूप से भारत से गए कामगारों और व्यापारियों के बीच गहरी चिंता का माहौल बन गया है। यात्रा करने वाले लोग और खाड़ी में बसने वाले भारतीय लगातार बदलते सुरक्षा हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वह अमेरिका को जिम्मेदार ठहराए और इस सैन्य टकराव को तुरंत रोके ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।