UAE और तुर्की की कंपनियों पर अमेरिका का बड़ा शिकंजा, ईरान ने विमानन प्रतिबंधों को बताया आर्थिक आतंकवाद

Nura Basta10 September 20263 min read33 viewsUAE
UAE और तुर्की की कंपनियों पर अमेरिका का बड़ा शिकंजा, ईरान ने विमानन प्रतिबंधों को बताया आर्थिक आतंकवाद

अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र यानी एविएशन सेक्टर पर एक नया प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे खाड़ी देशों में भी हलचल तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के राजदूत ने इस कदम को सीधे तौर पर आर्थिक आतंकवाद करार दिया है। इस नए प्रतिबंध का असर सिर्फ ईरान पर ही नहीं, बल्कि UAE, तुर्की, मलेशिया और कजाकिस्तान की उन कंपनियों पर भी पड़ेगा जो विमान और तकनीक के लेन-देन से जुड़ी हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के इस बड़े फैसले के बाद से विमान यात्रा करने वाले और इन देशों में रहने वाले लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर उड़ानों और विमान संचालन पर पड़ सकता है।

यूएस ट्रेजरी विभाग का बड़ा एक्शन और नई पाबंदियां

अमेरिका के US Treasury Department's Office of Foreign Assets Control (OFAC) ने 8 सितंबर 2026 को इस नए प्रतिबंध की घोषणा की। यह कार्रवाई 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत और एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 13902 के अंतर्गत की गई है। इस पाबंदी के दायरे में कुल 36 संस्थाएं आई हैं, जिनमें ईरान की सभी बची हुई 27 एयरलाइंस भी शामिल हैं। इसके अलावा UAE, तुर्की, मलेशिया और कजाकिस्तान की कई कंपनियां भी इसकी चपेट में आ गई हैं जिन पर अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक खरीदने में मदद करने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां इन प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस के साथ कारोबार जारी रखेंगी, उन्हें ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम से बाहर किया जा सकता है। इस बारे में अधिक जानकारी U.S. Treasury Department Press Release पर देखी जा सकती है।

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उ उड़ानों और विमान संचालन पर असर

इस नए आदेश के तहत OFAC ने पहले से चल रही तीन विमानन स्वीकृतियों को भी सस्पेंड कर दिया है। इसका असर ईरान में अमेरिकी मूल के या अमेरिकी नियंत्रण वाले विमानों के आने-जाने और ओवरफ्लाइट्स पर पड़ेगा। हालांकि, सरकार ने एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है ताकि 23 सितंबर 2026 तक कुछ पुराने और पहले से स्वीकृत लेन-देन को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके। इसके बाद सुरक्षा से जुड़ी किसी भी नई मांग पर बहुत कड़ाई से और हर मामले की अलग से जांच करके ही फैसला लिया जाएगा। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि क्षेत्रीय हवाई रूट और विमानों की आवाजाही पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।

ईरान का कड़ा रुख और स्थानीय क्षमताओं पर भरोसा

अमेरिका के इस कड़े फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन के चेयरमैन कैप्टन Abouzar Shiroudi ने 9 सितंबर 2026 को बयान दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों से देश का नागरिक विमानन उद्योग रुकने वाला नहीं है। उन्होंने माना कि इससे उड़ानों का खर्च जरूर बढ़ सकता है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ईरान का विमानन क्षेत्र पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच ही काम कर रहा है। ईरान अब पूरी तरह से अपनी स्थानीय क्षमताओं पर भरोसा करेगा और उड़ान की सुरक्षा को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता यानी 'रेड लाइन' बनाए रखेगा। खाड़ी क्षेत्र में इस तरह के तनावों के बीच विमानन कंपनियों और वहां रहने वाले आम लोगों को आने वाले दिनों में और सतर्क रहने की जरूरत है।

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