Iran UN Envoy Criticism: ईरान के राजदूत ने यूनिसेफ पर साधा निशाना, बच्चों की मौत पर कार्रवाई न करने का लगाया गंभीर आरोप।

संयुक्त राष्ट्र में Iran के राजदूत ने 2 सितंबर 2026 को UNICEF की कार्यशैली पर सवाल उठाए और तीखी आलोचना की। ईरानी दूत का कहना था कि देश में संघर्ष के कारण लगातार बच्चों की जान जा रही है, लेकिन इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय संस्था की तरफ से कोई ठोस प्रतिक्रिया या कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। इस पूरी घटना की जानकारी सबसे पहले Al Jazeera English द्वारा रिपोर्ट की गई थी, जिससे यह साफ पता चलता है कि देश के भीतर चल रहे तनाव का सीधा असर आम नागरिकों और मासूम बच्चों पर पड़ रहा है।
यूनिसेफ की रिपोर्ट में बच्चों की मौतों का बड़ा खुलासा
साल 2026 के दौरान UNICEF ने लगातार ईरान में बच्चों की स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्ट साझा की है। आंकड़ों के अनुसार स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। इसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को मीनाब स्थित एक गर्ल्स एलीमेंट्री स्कूल पर हुए हमले से हुई थी, जिसमें 7 से 12 वर्ष की उम्र की 168 बच्चियों की मौत हो गई थी। इसके बाद हालात और बिगड़ते चले गए और 19 मार्च 2026 तक UNICEF USA ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी कि 28 फरवरी से शुरू हुई भारी हिंसा के बाद से देश भर में 214 बच्चे मारे जा चुके हैं और 1,190 बच्चे घायल हुए हैं।
जुलाई महीने के आंकड़े और अन्य दर्दनाक घटनाएं
हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 जुलाई 2026 तक मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के लिए UNICEF के एक्टिंग रीजनल डायरेक्टर Abdul Fofana ने एक बयान में पुष्टि की कि पिछले पांच महीनों के दौरान 2,500 से अधिक बच्चे या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने विशेष तौर पर यह बताया कि इनमें से 386 बच्चों की मौत हुई है और 2,117 बच्चे घायल हुए हैं। इसके अलावा 30 जुलाई 2026 को قشم द्वीप (Qeshm Island) पर एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाकर हमला किया गया, जिसमें एक दो साल के बच्चे और उसके माता-पिता की दर्दनाक मौत हो गई थी।
स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर भी पड़ा बुरा असर
साल की शुरुआत यानी 11 जनवरी 2026 को ही UNICEF के रीजनल डायरेक्टर Edouard Beigbeder ने सार्वजनिक अशांति के दौरान बच्चों की मौत और उनके घायल होने पर गहरी चिंता जताई थी। इसके बाद मार्च 2026 की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई कि देश भर में कम से कम 20 स्कूल और 10 अस्पताल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसकी वजह से आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी जरूरी सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गई हैं। UNICEF लगातार सभी पक्षों से अपील कर रहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून यानी International Humanitarian Law का पूरी तरह से पालन करें और यह सुनिश्चित करें कि युद्ध जैसी स्थितियों में स्कूल और आम नागरिक सुरक्षित रहें।