ईरान की दो टूक, अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों को दुनिया करे खारिज, आर्थिक तनाव के बीच बड़ा बयान.

ईरान के विदेश मंत्रालय ने 28 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि सभी देशों को अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों को लागू करने से बचना चाहिए। मंत्रालय ने साफ कहा है कि जो भी देश इन नियमों को लागू करने में साथ देगा, वह एक तरह से अमेरिका की जबरदस्ती और गलत फैसलों में शामिल माना जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट द्वारा 24 अगस्त 2026 को लाए गए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत बनाए गए नए आर्थिक नियमों को पूरी तरह से गैरकानूनी और मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।
संयुक्त राष्ट्र के नियमों का हवाला
तेहरान का यह कहना है कि अमेरिका के ये कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों के खिलाफ हैं। ईरान के मुताबिक, किसी भी स्वतंत्र देश के अंदरूनी मामलों में दखल देना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को रोकना गलत है। मंत्रालय ने इसके लिए साल 1970 और 1981 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्तावों का हवाला दिया है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र में उप स्थायी प्रतिनिधि गुलामहुसैन دهघानी ने भी 26 अगस्त 2026 को इन बातों को दोहराया था और कहा था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान अपने हक और मुआवजे की मांग करने का पूरा अधिकार रखता है।
बैंक मेल्ली और वैश्विक कारोबार पर खतरा
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दुनिया भर में बैंक मेल्ली की सभी शाखाओं को बंद करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे डॉलर आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा। इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 22 अगस्त 2026 को अमेरिकी नीति की आलोचना की थी और इसे अपनी हद पार करने वाला कदम बताया था। ईरान का कहना है कि उसे अमेरिका और इस्राइल की तरफ से एक साथ सैन्य और आर्थिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है और वह अपनी सुरक्षा के लिए हर मुमकिन कदम उठाएगा। हालांकि चीन ने इन प्रतिबंधों का सार्वजनिक तौर पर विरोध किया है, फिर भी ईरान जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित बैंक मेल्ली शाखा समेत अपनी वित्तीय स्थिति को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है।