अमेरिका के मिलिट्री हमलों के बाद ईरान में मची तबाही, 18 लोगों की हुई मौत और संयुक्त राष्ट्र ने की शांति की अपील.

Aanya3 September 20263 min read42 viewsWorld
अमेरिका के मिलिट्री हमलों के बाद ईरान में मची तबाही, 18 लोगों की हुई मौत और संयुक्त राष्ट्र ने की शांति की अपील.

मध्य पूर्व में तनाव इस समय अपने चरम पर पहुंच चुका है जहां हाल ही में अमेरिका की तरफ से किए गए सैन्य हमलों के बाद ईरान से बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। 3 सितंबर 2026 को ईरानी स्वास्थ्य अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा की कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की वजह से कुल 18 लोगों की जान चली गई है, जिनमें कम से कम एक मासूम बच्चा भी शामिल है। इस पूरे मामले ने खाड़ी देशों के साथ-साथ पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है और आम लोग सुरक्षा को लेकर काफी डरे हुए हैं।

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने की पुष्टि और घायलों का आंकड़ा

ईरान के स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद-रेज़ा ज़फ़रघंदी और मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता हुसैन केर्मानपुर ने इस दुखद मौत के आंकड़े की पुष्टि की है। उन्होंने मीडिया को बताया कि इन हमलों में कुल 142 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि घायलों में से 44 लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 साल से कम है। इसके अलावा मारे जाने वालों में दो महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल है, जिससे आम नागरिकों पर इस युद्ध का सीधा असर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

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ईरानी रेड क्रीसेंट का बड़ा दावा और शादी समारोह पर हमला

ईरान की संस्था ईरानी रेड क्रीसेंट ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि दक्षिणी तट पर स्थित सिरीक या कुहेस्ताक इलाके में एक शादी के समारोह पर हमला हुआ। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जिसमें एक चार साल का बच्चा भी शामिल था। इस हमले में लगभग 50 से 68 लोग घायल बताए जा रहे हैं जो उस शादी में शामिल होने पहुंचे थे। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में बहुत ज्यादा गुस्सा और डर का माहौल बना हुआ है।

अमेरिका की तरफ से क्या कहा गया

दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रवक्ता नेवी कैप्टन टिम हॉकिंस ने यह साफ कर दिया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इन ठिकानों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, समुद्री एसेट्स, बारूदी सुरंग बिछाने वाले उपकरण और संचार केंद्र शामिल थे। कैप्टन टिम हॉकिंस ने यह भी बताया कि ये हमले हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को मिल रही धमकियों के जवाब में किए गए थे। हालांकि अमेरिकी सेना ने यह पूरी तरह से खारिज किया कि वे आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रूप ने इन हमलों की तेजी का समर्थन किया और कहा कि यह संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस कार्रवाई में किसी भी अमेरिकी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

पड़ोसी देशों में भी फैला तनाव और यूएन की चेतावनी

इस सैन्य टकराव का असर अब ईरान के पड़ोसी देशों पर भी साफ दिखने लगा है। ईरान की तरफ से बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इराक में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए। कुवैत के सैन्य अधिकारियों ने बाहर से आ रहे खतरों को हवा में ही नाकाम करने की बात कही, जबकि जॉर्डन की सेना ने यह कन्फर्म किया कि उन्होंने हवा में ही 13 बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्व रोक लिया। इस गंभीर हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नागरिकों के हताहत होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने की अपील की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए ताकि और अधिक बेकसूर लोगों की जान न जाए।

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