Iran War Update: अमेरिकी मिसाइल हमले के छह महीने बाद भी ईरान के स्कूल पर न्याय का इंतजार जारी.

Aanya27 August 20262 min read38 viewsWorld
Iran War Update: अमेरिकी मिसाइल हमले के छह महीने बाद भी ईरान के स्कूल पर न्याय का इंतजार जारी.

ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजरेह तय्यबेह प्राइमरी स्कूल पर अमेरिकी सेना के मिसाइल हमले को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। इस भयानक हमले में 150 से 170 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर छोटे बच्चे शामिल थे। आज भी दुखी परिवार अपनों की कब्रों पर जाते हैं और इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। हमले के इतने दिन बाद भी लापता बच्चों की तलाश जारी है और लोग इस दर्द को भूल नहीं पा रहे हैं।

हमले की तारीख और स्वतंत्र जांच रिपोर्ट

यह दर्दनाक घटना 28 फरवरी 2026 को सुबह 10:23 से 10:45 के बीच हुई थी, जो 2026 के ईरान युद्ध का पहला दिन था। स्वतंत्र जांच एजेंसियों, जिनमें अल जज़ीरा, बीबीसी वेरीफाई और द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट शामिल हैं, ने यह साफ किया है कि उस स्कूल पर एक अमेरिकी टोमाहाक मिसाइल गिरी थी। वह स्कूल पास की सैन्य इमारतों से पिछले एक दशक से पूरी तरह अलग था। जून 2026 में एमनेस्टी इंटरनेशनल यूएसए ने भी साफ कहा था कि इस हमले के लिए अमेरिकी सेना ही जिम्मेदार है, जिसमें सात से बारह साल के बच्चे बैठे थे।

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अमेरिका और ईरान का पक्ष

अमेरिकी सेना की अंदरूनी जांच में यह बात सामने आई थी कि 'ऑपरेशन एपिप फ्यूरी' के दौरान टारगेट सेट करने में गलती हुई थी। इस ऑपरेशन में पालाटिर के मावेन स्मार्ट सिस्टम और एंथ्रोपिक के क्लाउड जैसे एआई सिस्टम का इस्तेमाल होने की बात कही गई थी। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिका या इस्राइल में से किसी ने भी आधिकारिक तौर पर अपनी गलती नहीं मानी है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले इस हमले में हाथ होने से इनकार किया था और मार्च 2026 के मध्य तक उनकी अंदरूनी जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी।

दूसरी तरफ, ईरान की सरकार ने अमेरिका के बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी सरकार ने इस हमले को एक खुला युद्ध अपराध और अंतरराष्ट्रीय मानवीय नियमों का उल्लंघन बताया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे ईरानी जनता के खिलाफ एक बड़ा जुर्म करार दिया है। इसके अलावा यूनेस्को और कई मानवाधिकार संगठनों ने भी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सैन्य योजना बनाते समय यह साफ दिख रहा था कि वह एक स्कूल है और वहां मासूम बच्चे पढ़ते हैं।

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