UAE और जॉर्डन पर ईरान का हमला, अमेरिका से विवाद खत्म करने के लिए ईरान ने रखी बड़ी शर्त.

Nura Basta31 August 20263 min read32 viewsUAE
UAE और जॉर्डन पर ईरान का हमला, अमेरिका से विवाद खत्म करने के लिए ईरान ने रखी बड़ी शर्त.

क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए अमेरिका को तुरंत इस्लामाबाद समझौता यानी MoU के नियमों का उल्लंघन करना बंद करना होगा। ईरान का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका अपने तरीकों में बदलाव नहीं करता, तब तक हालात सामान्य होना मुमकिन नहीं है। इस हालिया बयान से साफ है कि खाड़ी देशों में शांति की बहाली के लिए अभी कूटनीतिक स्तर पर काफी अड़चनें बनी हुई हैं, जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों और कामगारों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

अटैक और जवाबी कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम

गत सप्ताहांत यानी 30 से 31 अगस्त के दौरान खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव काफी बढ़ गया था। अमेरिकी सेना ने 30 अगस्त को होर्मुज जलडमरूमध्य में लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लांचरों को निशाना बनाकर सैन्य हमले किए। अमेरिका का आरोप था कि ईरान वहां समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था। इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दाग दिए। जॉर्डन की तरफ से जानकारी दी गई कि उसने हवा में ही 8 मिसाइलों को सफलताપૂર્વक रोक लिया। वहीं, UAE रक्षा मंत्रालय ने भी अपने समुद्री क्षेत्र के ऊपर एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की है।

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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव

ईरान के विदेश मंत्रालय ने लारक द्वीप पर हुए हमले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है। ईरान का तर्क है कि उसने जो जवाबी हमले किए हैं, वे आत्मरक्षा के अधिकार के तहत आते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इन हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अमेरिका इसका करारा जवाब देगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हम उन पर कड़ा प्रहार करेंगे और इसका जवाब जरूर दिया जाएगा। इसके अलावा, व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के पास सभी विकल्प खुले हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में तनाव और ज्यादा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या है इस्लामाबाद समझौता और विवाद की असल वजह

अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून 2026 को इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य अभियानों को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना था। लेकिन ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi समेत कई बड़े अधिकारियों ने अमेरिका पर इस समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है। ईरान का मुख्य गुस्सा इस बात पर है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अवैध दक्षिणी मार्ग बना लिया है और समझौते के मुताबिक नौसैनिक नाकेबंदी को नहीं हटाया गया है। इस समझौते के पैराग्राफ 9 में यह साफ तय हुआ था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति को बनाए रखेगा और अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा या अतिरिक्त सैन्य बल तैनात नहीं करेगा।

बातचीत और कूटनीतिक प्रयास

दोनों देशों के बीच एक अंतिम समझौते को लेकर बातचीत 17 अगस्त 2026 तक पूरी होनी थी, लेकिन आपसी अविश्वास और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह प्रक्रिया अभी पूरी तरह रुकी हुई है। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इससे पहले 28 अगस्त को यह बयान दिया था कि कूटनीति तभी पटरी पर लौट सकती है जब वाशिंगटन दबाव की अपनी पुरानी और असफल नीतियों को छोड़ देगा और ईरान के संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान करेगा। इस पूरे घटनाक्रम पर खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अशांति का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी, उड़ानों और व्यापार पर पड़ता है।

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