हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ईरान की अमेरिका के सामने बड़ी शर्त, जानिए क्या है पूरा मामला.

Aanya27 August 20263 min read81 viewsEnglish
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ईरान की अमेरिका के सामने बड़ी शर्त, जानिए क्या है पूरा मामला.

खाड़ी देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता हुआ नजर आ रहा है क्योंकि ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें नहीं मानता, तब तक सामरिक रूप से बेहद अहम रास्ता नहीं खुलेगा। 27 अगस्त 2026 को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि अमेरिका को हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से चालू करने के लिए तेहरान की सभी शर्तों को पूरा करना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वॉशिंगटन को तेहरान की शिकायतों को दूर करने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहीबी ने भी इस बात का समर्थन किया और कहा कि जब तक अमेरिका पहले से हुए समझौते यानी एमओयू का पालन नहीं करता और ईरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक यह रास्ता बंद ही रहेगा।

ईरान की मुख्य मांगें और अमेरिका का रुख

तेहरान की तरफ से रखी गई मांगों में मुख्य रूप से ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत हटाना शामिल है। इसके अलावा ईरान के रोके गए सरकारी फंड को जारी करना, नए प्रतिबंधों को लगाना बंद करना और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती को और बढ़ाने से रोकना भी इन शर्तों में शामिल है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने दुश्मन के सैन्य जहाजों को अपने पानी से कम से कम 400 किलोमीटर यानी 248 मील दूर धकेल दिया है। इस बीच, उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने जानकारी दी कि ओमान के साथ चल रही बातचीत से एक ऐसा समझौता हो सकता है जिससे इस रास्ते से सैन्य जहाजों की आवाजाही पर रोक लग जाएगी। दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला हुआ है और सामान्य रूप से काम कर रहा है। ईरान लगातार अमेरिका पर जून महीने में हुए उस समझौते के नियमों को लागू न करने का आरोप लगा रहा है, जिसका मकसद दुश्मनी को खत्म करना था।

राजनयिक कोशिशें और समुद्री सुरक्षा पर असर

तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी लगातार जारी हैं। गुरुवार को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य मकसद हालात को शांत करना और एक अस्थायी साझा समुद्री गलियारे के प्रस्ताव पर चर्चा करना था। हालांकि Defa Press की एक सैन्य रिपोर्ट में इस गलियारे का जिक्र आया है, लेकिन इस रास्ते को पूरी तरह से खोलने का काम अभी भी अटका हुआ है। ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संगठन यानी UKMTO ने 27 अगस्त को एक चेतावनी जारी की थी, जो ओमान के पास एक कमर्शियल टैंकर पर किसी अज्ञात चीज से हुए हमले और उसके बाद लगी आग के बाद आई थी। इससे पहले 24 अगस्त को भी एक ऐसा ही हमला हुआ था। इस पूरी स्थिति का असर उन लोगों पर भी पड़ रहा है जो खाड़ी देशों में काम करते हैं या अक्सर यात्रा करते हैं, क्योंकि ऐसे तनावपूर्ण हालात से सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।

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