UAE और Jordan पर ईरान का हमला, अमेरिका के खिलाफ तनातनी बढ़ी, Strait of Hormuz अभी भी बंद.

मध्य पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अमेरिका तथा ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। 1 सितंबर 2026 को ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया कि उनका देश अमेरिका के सैन्य हमलों और आर्थिक दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब क्षेत्रीय हिंसा में अचानक तेजी आई और 31 अगस्त 2026 की रात को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित Larak Island पर जबरदस्त हमला बोल दिया। अमेरिकी बलों ने वहां ईरान के दो रॉकेट लॉन्चर और सी माइन्स को निशाना बनाया, जिसमें ईरानी अधिकारियों के मुताबिक दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।
जॉर्डन और UAE पर ईरान का पलटवार
अमेरिकी हमलों का जवाब देते हुए ईरान ने भी कड़ा कदम उठाया और जॉर्डन तथा यूएई (UAE) की तरफ मिसाइलें और ड्रोन दाग दिए। ईरान ने जॉर्डन में स्थित King Hussein और Al Azraq अमेरिकी सैन्य अड्डों के साथ-साथ यूएई के Al Menhad एयरबेस को निशाना बनाया। हालांकि, जॉर्डन और यूएई के स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि हवा में ही सभी ईरानी हथियारों को या तो नाकाम कर दिया गया या फिर वे अपने निशाने पर पहुंचकर कोई नुकसान नहीं पहुंचा सके। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में ईरान का बयान
किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन के दौरान 1 सितंबर 2026 को ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका जून 2026 में हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं पर वापस लौटता है, तो ईरान तुरंत इसका जवाब देगा। दोनों देशों के बीच तनाव खत्म करने के लिए यह समझौता हुआ था, लेकिन अमेरिका की तरफ से तेहरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध की घोषणा के बाद यह समझौता पूरी तरह से बिखर गया। राष्ट्रपति पेजेश्कियन इस बढ़ते संकट पर चर्चा करने के लिए रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin से भी मुलाकात करने वाले हैं।
सैनिक अधिकारियों की चेतावनी और अमेरिका का रुख
उसी दिन यानी 1 सितंबर 2026 को ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका यदि ईरानी क्षेत्र पर हमला करने के लिए किसी भी जगह का इस्तेमाल करेगा, तो ईरान उसे नेस्तनाबूद कर देगा। साथ ही, क्षेत्रीय देशों के एयरस्पेस और सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर भी कड़े शब्दों में आगाह किया गया। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इन हमलों को बहुत सीमित बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर और भी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद और नए आर्थिक प्रतिबंध
तनाव के इस माहौल के बीच रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz को ईरान ने अभी भी बंद रखा है। गत 31 अगस्त 2026 की रात को इस जलमार्ग से गुजर रहे सऊदी क्रूड ऑयल ले जाने वाले दो सुपर टैंकरों पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले की खबर सामने आई थी। सैन्य तनाव के साथ-साथ अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने Operation Economic Outcast की शुरुआत कर दी है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए कई नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसमें जनरल लाइसेंस जी को निलंबित करना भी शामिल है, जिससे हजारों ईरानी नागरिकों की शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं। खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए इन घटनाओं पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।