यमन के रेड सी कोस्ट पर हूथी विद्रोहियों का कब्जा, ईरान ने खुलकर की तारीफ और दिया बड़ा बयान।

यमन में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ ईरान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट Mohammad Reza Aref ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया के जरिए यमन के रेड सी कोस्ट यानी लाल सागर के तट पर हूथी लड़ाकों की जीत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को यमन के वीर राष्ट्र की जीत बताया है और क्षेत्र के सभी नेताओं से अपील की है कि वे बाहरी देशों पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म कर लें। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर एक इस्लामिक आर्थिक और राजनीतिक गुट बनाना चाहिए ताकि क्षेत्रीय मामलों में अपने फैसले खुद लिए जा सकें। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अचानक बहुत ज्यादा तेज हो गई हैं और आम जनता से लेकर बड़े देशों की इस पर पूरी नजर बनी हुई है।
कब्जे के पीछे की पूरी कहानी और सैन्य रणनीति
यह पूरा क्षेत्रीय बदलाव एक बेहद खतरनाक और लंबे 18 घंटे के सैन्य अभियान के बाद देखने को मिला जो 11 सितंबर 2026 को जाकर पूरा हुआ था। इस दौरान हूथी ताकतों ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Perim (Mayyun) Island यानी पेरिम द्वीप पर अपना पूरा अधिकार जमा लिया। इस द्वीप के हाथ लगने से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य यानी Bab el-Mandeb Strait पर हूथी विद्रोहियों की पकड़ पूरी तरह मजबूत हो गई है। इस बड़े कदम से ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को बंदरगाह शहर मोचा यानी Mocha के साथ-साथ धुबाब और मुराद जैसे महत्वपूर्ण शहरों पर भी कब्जा कर लिया गया था। इन सभी इलाकों के हाथ आने के बाद अब हूथी विद्रोहियों का दावा है कि उनका नियंत्रण यमन के पूरे लाल सागर तट पर हो चुका है और वे इस क्षेत्र में अपनी स्थिति बेहद मजबूत मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा पर बड़ा असर
दुनियाभर के सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह से यमन के तटीय इलाकों का विस्तार होने से ईरान को अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष में एक बहुत बड़ा कूटनीतिक फायदा मिल गया है। जिस तरह से हूथी लड़ाकों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण स्थापित किया है, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा प्रभाव ईरान खुद होर्मुज जलडमरूमध्य पर रखता है। समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा सैन्य अभियान ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सीधे मार्गदर्शन और देखरेख में चलाया गया था ताकि अमेरिका के हितों के खिलाफ एक नया मोर्चा खोला जा सके। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के जाने-माने विश्लेषक Baraa Shiban ने भी इस बात की चेतावनी जारी की है कि आने वाले समय में हूथी इस इलाके में पानी के भीतर नेवल माइंस यानी समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा सकते हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
यमन सरकार की जवाबी कार्रवाई और संयुक्त राष्ट्र की चिंता
इस अचानक हुए सैन्य हमले के बाद यमन की सरकारी सेनाएं, जो पेरिम द्वीप और धुबाब से पीछे हट गई थीं, अब एक नए काउंटर-ऑफेन्सिव यानी जवाबी हमले की पूरी तैयारी कर रही हैं। सरकारी बलों ने नए हथियारों और विमानों को तैनात करने का ऐलान किया है ताकि खोए हुए इलाकों को वापस हासिल किया जा सके। दूसरी तरफ हूथी प्रवक्ता Mohammed Abdulsalam ने गुरुवार को साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रास्ते पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे किसी भी व्यावसायिक नौवहन को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं। उन्होंने इन सैन्य कार्रवाइयों को विशुद्ध रूप से एक रक्षात्मक उपाय बताया और कहा कि यह तभी रुकेगा जब यमन पर लगे सभी प्रकार के नाकाबंदी हटा लिए जाएंगे। उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आपातकालीन सत्र को संबोधित करते हुए यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg ने कहा कि इस तरह से दोबारा शुरू हुआ युद्ध हम सभी के लिए बेहद चिंता का विषय बनना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा तनाव इस बात की ओर इशारा करता है कि क्षेत्र में शांति का दौर खत्म हो चुका है और अब एक बेहद खतरनाक चरण की शुरुआत हो चुकी है जिसका असर आम लोगों के जीवन पर भी साफ तौर पर दिखाई देगा।