क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ से की अहम मुलाकात, हालात पर चर्चा.

क्षेत्रीय सुरक्षा संकट और लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान और पाकिस्तान के बीच उच्च स्तर पर बातचीत का दौर शुरू हो गया है। गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में मचे घमासान और सुरक्षा संकट को लेकर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान, अमेरिका और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच hostilities काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं और पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है।
इसी दिन ईरानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री Faisal bin Farhan के साथ भी अलग से मंत्रणा की। ईरान के राजदूत Dr. Reza Amiri Moghadam के साथ हुई हालिया बैठक में Abbas Araghchi ने इस बात पर जोर दिया था कि तेहरान और इस्लामाबाद को क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए लगातार संपर्क में रहना चाहिए। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़के तनाव के कारण क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यमन में चल रही भीषण लड़ाई और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आवाजाही बाधित होने से हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने इस रूट पर ट्रैफिक को सीमित कर दिया है, जिससे समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है।
तनाव और कूटनीतिक हलचल
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास पांच ईरानी तेल टैंकरों के डूबने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लगभग 10 जहाजों को निशाना बनाया, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए। ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब की बुनियादी ढांचे पर हो रहे हूती हमलों को लेकर तेहरान तक एक संदेश पहुंचाया था, हालांकि ईरान का यह पक्ष है कि हूती आंदोलन पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम करता है और उसका ईरान से सीधा निर्देश नहीं मिलता है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान अपनी तटस्थता की नीति पर कायम है और कूटनीतिक प्रयासों को लगातार बढ़ावा दे रहा है।
पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने मिस्र के विदेश मंत्री Badr Abdelatty से बात की है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य Regional Four (R4) फोरम के जरिए आपसी तालमेल को मजबूत करना था, जिसमें सऊदी अरब और तुर्किए भी शामिल हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर सऊदी अरब की सीमा पर किसी भी प्रकार की बाहरी आक्रामकता बढ़ती है, तो मक्का रक्षा समझौता लागू किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में रियाद और अंकारा जैसी क्षेत्रीय ताकतें भी इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हो सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि इस बड़े संघर्ष को फैलने से रोका जा सके। इस पूरी आधिकारिक जानकारी के लिए आप MoFA Pakistan Press Release पर जा सकते हैं।