अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करना चाहता है इराक, क्षेत्रीय शांति के लिए उठाया बड़ा कदम।

इराक के प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार Qassim al-Araji ने 29 अगस्त 2026 को यह बात साफ की है कि उनका देश अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाकर रखना चाहता है। अल-अराजी ने अल-जazeera से बात करते हुए बताया कि बगداد का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के सभी देशों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए समझौतों तक पहुंचने में मदद करना और एक मजबूत कूटनीतिक पुल की तरह काम करना है।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सैन्य अभियान
यह कूटनीतिक कोशिश ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ चुका है और दोनों तरफ से सैन्य व आर्थिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका इस समय Operation Economic Outcast नाम से आर्थिक दबाव का अभियान चला रहा है, जिसके तहत कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 29 अगस्त 2026 को ईरानी शासन के वित्तीय चैनलों को रोकने के लिए यूएई के Banque Misr UAE को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा अमेरिका द्वारा Operation Epic Fury भी चलाया जा रहा है जिसमें ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी शामिल है।
ईरान की घरेलू और आर्थिक मुश्किलें
दूसरी तरफ ईरान भी इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 29 अगस्त 2026 को जोर देकर कहा कि देश की मौजूदा मुश्किलों को पार करने के लिए राष्ट्रीय एकता और इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MoU को लागू करना बहुत जरूरी है। वहीं ईरानी उप-विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने उसी दिन इस बात की पुष्टि की कि ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz के नियंत्रण को लेकर एक समझौता हो गया है, हालांकि इसे पूरी तरह लागू करना अमेरिका द्वारा इस्लामाबाद समझौते को मानने पर निर्भर करता है।
इराक के घरेलू मोर्चे पर हथियार नियंत्रण
घरेलू स्तर पर इराकी सरकार सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया को संभालने में जुटी हुई है। 29 अगस्त 2026 को इराक के एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि कताइब हिजबुल्लाह जैसे समूहों ने अमेरिकी बलों की वापसी और अपने नेताओं के लिए छूट की शर्त पर अपने हथियारों को दो साल के लिए रोकने का प्रस्ताव रखा था, जिसे इराकी सरकार ने साफ तौर पर ठुकरा दिया है। इसके अलावा ईरान समर्थित समूह कताइब सैय्यद अल-शुहदा ने कहा है कि वह हथियार नियंत्रण के प्रयासों में तभी सहयोग करेगा जब अमेरिकी सेना इराक से पूरी तरह बाहर चली जाएगी। रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि ईरान के नेतृत्व ने अमेरिका के साथ लंबी लड़ाई की तैयारी के लिए अपने रुख को सख्त कर लिया है और साथ ही देश के अंदर चल रहे असंतोष को दबाने की कोशिश भी कर रहा है।