इराक ने किया साफ़, 30 सितंबर को हटेगी अमेरिकी सेना, सुरक्षा को लेकर बड़ा समझौता लागू.

इraqi अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि देश से अमेरिका के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन सेनाओं की पूरी तरह से वापसी के लिए 30 सितंबर 2026 की तारीख बिल्कुल तय और आखिरी है। इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सितंबर 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते को पूरी तरह से लागू करना है। इराकी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़र Qasim al-Araji ने रविवार को इस बात की पुष्टि की कि सैनिकों और साजो-सामान को चरणबद्ध तरीके से हटाने का काम पहले से ही शुरू हो चुका है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि इस तय सीमा में किसी भी तरह की देरी करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आर्मड फोर्सेस के कमांडर-इन-चीफ के कार्यालय के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल Abdul Amir al-Shammari ने भी इस समयसीमा की पुष्टि करते हुए इसे आपसी संबंधों का एक नया अध्याय बताया है।
हथियार सरेंडर करने का नया आदेश और स्थानीय विवाद
जैसे-जैसे यह डेडलाइन करीब आ रही है, वैसे-वैसे देश में आंतरिक सुरक्षा को लेकर नए निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने एक कड़ा आदेश जारी किया है जिसके तहत सभी गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को 30 सितंबर तक अपने हथियार पूरी तरह से सरेंडर करने होंगे। यदि ये समूह ऐसा नहीं करते हैं तो इन्हें आतंकवाद के आरोपों का सामना करना पड़ेगा। इस आदेश के बावजूद, Harakat al-Nujaba, Kataib Hezbollah और Kataib Sayyid al-Shuhada जैसे गुट लगातार अपने हथियार छोड़ने का विरोध कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये गुट अपने हथियारों को पूरी तरह सौंपने के बजाय उन्हें नियंत्रित या फ्रीज करने के किसी प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क के भीतर बनी एक कमेटी, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री Mohammed Shiaa al-Sudani, Nouri al-Maliki और Hadi al-Amiri जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं, इस चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत और मध्यस्थता कर रही है।
कुर्दिस्तान क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और अमेरिकी सहायता का अंत
कूर्दिस्तान क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। यहां से अमेरिकी गठबंधन की एयर डिफेंस प्रणालियों, जिनमें पैट्रियट और सी-रैम यूनिट्स शामिल हैं, को हटाए जाने के बाद ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से जुड़ी आशंकाएं काफी बढ़ गई हैं। इन हालातों को देखते हुए कुर्दिश अधिकारी अब बगदाद सरकार से पुख्ता सुरक्षा की गारंटी मांग रहे हैं। इसके अलावा, पेशमर्ग (Peshmerga) बलों को मिलने वाली अमेरिकी वित्तीय सहायता, जो सालाना लगभग 61 मिलियन डॉलर है, वह भी ठीक 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगी। उधर, हरकात अल-नुजबा ने यह खुली धमकी दी है कि यदि डेडलाइन के बाद भी कोई भी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी देश में पाई जाती है तो वे उनके ठिकानों पर हमले करेंगे।
भविष्य में खुफिया सहयोग और रक्षा आधुनिकीकरण की योजना
औपचारिक रूप से सैनिकों की वापसी के बाद भी अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के तहत खुफिया जानकारी साझा करने, ट्रेनिंग देने और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियानों में आगे भी सहयोग जारी रखने की अपनी योजना के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही इराक ने अपनी खुद की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए एक तीन साल की योजना का भी ऐलान किया है। जहां पूर्व अमेरिकी राजनयिक Marlin Hardinger जैसे विश्लेषक भविष्य में भी अमेरिकी आतंकवाद विरोधी गतिविधियों के जारी रहने की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं इराकी राजनीतिक विश्लेषक Atheer al-Shara ने इस पूरी वापसी पर संदेह जताया है। उनका मानना है कि रक्षा संबंध किसी न किसी रूप में आगे भी बने रह सकते हैं। सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ के प्रवक्ता Sabah al-Numan ने सभी सरकारी संस्थाओं से अपनी शक्ति और अधिकार बनाए रखने की अपील की है और साथ ही किसी भी तरह की पैनिक या घबराहट की स्थिति से बचने की सलाह दी है।