Strait of Hormuz में ईरान ने उड़ाया अमेरिकी ड्रोन, अमेरिका ने कहा मशीन खराब थी

Sushma Kumari10 September 20263 min read36 viewsWorld
Strait of Hormuz में ईरान ने उड़ाया अमेरिकी ड्रोन, अमेरिका ने कहा मशीन खराब थी

फारस की खाड़ी के सामरिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से काफी बढ़ गया है। 10 सितंबर 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने यह दावा किया कि उसने अपनी समुद्री सीमा के पास एक दुश्मन के मानवरहित ड्रोन जहाज को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच बयानों का दौर शुरू हो गया है और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से गहरी हो गई हैं।

IRGC का दावा और वीडियो सबूत

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने यह जानकारी दी कि उनका निशाना बनने वाला जहाज एक 'सेल-ड्रोन' था जिसका हल नंबर 5838 था। ईरानी अधिकारियों का यह कहना था कि इस ड्रोन ने उनके इलाके में घुसपैठ करने की कोशिश की थी जिसे पूरी तरह से नाकाम कर दिया गया है। IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहिब ने चेतावनी देते हुए यह बात कही कि इस क्षेत्र में उनकी कड़ी निगरानी बनी हुई है और कोई भी आधुनिक तकनीक उनकी नजरों से बचकर नहीं निकल सकती है। इस दावे के समर्थन में ईरानी सरकारी मीडिया चैनलों जैसे कि IRNA, मेहर न्यूज एजेंसी और अनादोलु एजेंसी की तरफ से कुछ वीडियो और तस्वीरें भी जारी की गईं जिनमें जलते हुए जहाज को साफ देखा जा सकता है। इसके अलावा हैदराबाद स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर यह मजाकिए अंदाज में लिखा कि पकड़ी गई तकनीक की अनबॉक्सिंग सेरेमनी अगले दिन सुबह की जाएगी जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान इस तकनीक को खुद कॉपी करने की कोशिश कर सकता है।

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अमेरिका और निर्माता कंपनी का पक्ष

दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की सेना ने इस पूरी घटना पर एक अलग ही कहानी सामने रखी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रवक्ता और नेवी कैप्टन टिम हॉकिन्स ने यह स्पष्ट किया कि वह जहाज कोई जासूसी ड्रोन नहीं बल्कि एंडुरिल कंपनी द्वारा बनाया गया एक 'डाइव-एलडी' ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल था। अमेरिकी सेना का यह कहना था कि यह यूनिट पहले से ही खराब हो चुकी थी और पिछले 24 घंटों से पानी में बेकार पड़ी हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि इस छोटे से क्राफ्ट में न तो कोई क्लासिफाइड रडार या सोनार उपकरण लगा हुआ था और न ही इसने कोई संवेदनशील जानकारी जुटाई थी। इसके साथ ही ड्रोन बनाने वाली कंपनी एंडुरिल ने भी इस नुकसान को बहुत बड़ा नहीं माना और कहा कि इस तरह के साजो-सामान उच्च जोखिम वाले इलाकों में काम करने के दौरान खो जाते हैं जिसे एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है।

विशेषज्ञों की राय और क्षेत्रीय प्रभाव

हडसन इंस्टीट्यूट के विश्लेषक ब्रायन क्लार्क का यह मानना है कि ईरान भले ही इस पकड़े गए वाहन के बाहरी ढांचे और मैकेनिकल सिस्टम की नकल करने की कोशिश कर ले, लेकिन इसके अंदर के सॉफ्टवेयर और सुरक्षा तंत्र को भेद पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। इस पूरी घटना के बाद से खाड़ी देशों में आने जाने वाले जहाजों और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। भारत और अन्य देशों से खाड़ी के रास्ते व्यापार करने वाले लोगों के लिए भी यह स्थिति नजर रखने वाली है क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से माल ढुलाई और यात्रा से जुड़ी गतिविधियों पर सीधा असर पड़ सकता है।

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